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बुधवार, 30 अप्रैल 2025

दैनिक पंचांग

शुक्ल पक्ष

बुधवार, शुक्ल पक्ष। इस दिन अक्षय तृतीया है। तृतीया तिथि दोपहर तक है, फिर चतुर्थी आरंभ होती है। चन्द्रमा रोहिणी नक्षत्र में शाम तक है, फिर मृगशिरा में। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है, नए कार्य के लिए शुभ। राहु काल 12:18 से 13:57 तक है, इसमें नया कार्य न करें। चन्द्रमा वृषभ राशि में है और सूर्य मेष राशि में।

इस दिन के पर्व

बुधवार, 30 अप्रैल

अक्षय तृतीया

पूर्वाह्न05:41 – 12:18

पूरा दिन दान, ख़रीद और नए कार्यों के लिए शुभ है; पूजा पूर्वाह्न में की जाती है।

अन्य नाम: आखा तीज

वर्ष के सबसे शुभ दिनों में से एक। माना जाता है कि इस दिन शुरू किया गया कार्य, दिया गया दान या ख़रीदा गया सोना अक्षय फल देता है।

तिथि · वार · चान्द्र मास

    • शुक्ल तृतीया

      पिछले दिन 17:31 से 14:12 तक

    • फिर

      शुक्ल चतुर्थी

      14:12 – अगले दिन 11:24

    तृतीया — सामान्यतः शुभ तिथि। यात्रा और उल्लासपूर्ण अवसरों के लिए उपयुक्त।

  • बुधवार

    बुधवार (स्वामी बुध) — संवाद और बुद्धि का दिन; अध्ययन, लेखन और व्यापार के लिए शुभ।

  • अमान्तवैशाख
    पूर्णिमान्तवैशाख

नक्षत्र · योग · करण

    • रोहिणी

      पिछले दिन 18:47 से 16:18 तक

    • फिर

      मृगशिरा

      16:18 – अगले दिन 14:20

    स्थिर नक्षत्र — दीर्घकालिक संकल्प, नींव और स्थायी क्रय के लिए श्रेष्ठ।

    • शोभन

      पिछले दिन 15:53 से 12:01 तक

    • फिर

      अतिगण्ड

      12:01 – अगले दिन 08:34

    शुभ योग — सूर्य और चन्द्रमा का संयोग अनुकूल है। अधिकांश नए आरंभ के लिए सहायक माना जाता है।

    • गर

      03:48 से 14:12 तक

    • फिर

      वणिज

      14:12 – अगले दिन 00:43

    चर करण — महीने भर दोहराए जाने वाले सात करणों में से एक; सामान्य कार्यों के लिए ठीक।

एक नज़र में दिन

मुख्य रूप से गुजरात, राजस्थान और उत्तर भारत में प्रचलित समय-प्रणाली: दिन की आठ और रात की आठ अवधियाँ, प्रत्येक शुभ, सामान्य या अशुभ चिह्नित। दैनिक कार्य का स्लॉट चुनने (या टालने) का त्वरित उपाय।

दक्षिण भारतीय परंपरा जिसमें दिन और रात को आठ-आठ गौरी अवधियों में बाँटा जाता है — दैनिक कार्यों के लिए शुभ समय चुनने में सहायक।

दिन के सात सबसे महत्त्वपूर्ण मुहूर्तों का संक्षिप्त संग्रह — तीन शुभ (ब्रह्म, अभिजित, अमृत) और चार अशुभ (राहु काल, यमगण्ड, गुलिक, वर्ज्यम्)। कुछ दिनों पर एक अवधि की गणना संभव न होने पर कम भी दिख सकते हैं।

दिन और रात प्रत्येक बारह होरा (ग्रह-घंटों) में बँटते हैं, हर एक का स्वामी ग्रह होता है। स्वामी ग्रह उस घंटे का स्वभाव तय करता है — कार्य के अनुकूल स्वामी वाला घंटा चुनें।

शुक्ल तृतीया · बुध

00061218लाभ · 05:41 – 07:20अमृत · 07:20 – 08:59काल · 08:59 – 10:39शुभ · 10:39 – 12:18रोग · 12:18 – 13:57उद्वेग · 13:57 – 15:37चल · 15:37 – 17:16लाभ · 17:16 – 18:55उद्वेग · 18:55 – 20:16शुभ · 20:16 – 21:36अमृत · 21:36 – 22:57चल · 22:57 – 00:18रोग · 00:18 – 01:38काल · 01:38 – 02:59लाभ · 02:59 – 04:19उद्वेग · 04:19 – 05:40लाभ · 05:41 – 07:20धन · 07:20 – 08:59सुख · 08:59 – 10:39चोर · 10:39 – 12:18विष · 12:18 – 13:57उद्योग · 13:57 – 15:37अमृत · 15:37 – 17:16रोग · 17:16 – 18:55उद्योग · 18:55 – 20:16अमृत · 20:16 – 21:36रोग · 21:36 – 22:57लाभ · 22:57 – 00:18धन · 00:18 – 01:38सुख · 01:38 – 02:59चोर · 02:59 – 04:19विष · 04:19 – 05:40ब्रह्म मुहूर्त · 04:15 – 04:58अमृत काल · 13:25 – 14:51राहु काल · 12:18 – 13:57यमगण्ड काल · 07:20 – 08:59गुलिक काल · 10:39 – 12:18वर्ज्यम् · 09:07 – 10:33बुध · 05:41 – 06:47चंद्र · 06:47 – 07:53शनि · 07:53 – 08:59गुरु · 08:59 – 10:06मंगल · 10:06 – 11:12सूर्य · 11:12 – 12:18शुक्र · 12:18 – 13:24बुध · 13:24 – 14:30चंद्र · 14:30 – 15:37शनि · 15:37 – 16:43गुरु · 16:43 – 17:49मंगल · 17:49 – 18:55सूर्य · 18:55 – 19:49शुक्र · 19:49 – 20:43बुध · 20:43 – 21:36चंद्र · 21:36 – 22:30शनि · 22:30 – 23:24गुरु · 23:24 – 00:18मंगल · 00:18 – 01:11सूर्य · 01:11 – 02:05शुक्र · 02:05 – 02:59बुध · 02:59 – 03:53चंद्र · 03:53 – 04:46शनि · 04:46 – 05:40

30 अप्रैल

दैनिक पंचांग

दिन का चौघड़िया

8·1 घं 39 मि
05:41
07:20
08:59
10:39
12:18
13:57
15:37
17:16

रात का चौघड़िया

8·1 घं 21 मि
18:55
20:16
21:36
22:57
00:18
01:38
02:59
04:19

दिन का गौरी

8·1 घं 39 मि
05:41
07:20
08:59
10:39
12:18
13:57
15:37
17:16

रात का गौरी

8·1 घं 21 मि
18:55
20:16
21:36
22:57
00:18
01:38
02:59
04:19
04:15–04:58
13:25–14:51
12:18–13:57
07:20–08:59
10:39–12:18
09:07–10:33

दिन के होरा

12·1 घं 6 मि
05:41
06:47
07:53
08:59
10:06
11:12
12:18
13:24
14:30
15:37
16:43
17:49

रात के होरा

12·54 मि
18:55
19:49
20:43
21:36
22:30
23:24
00:18
01:11
02:05
02:59
03:53
04:46

लाहिरी अयनांश और दृक् गणित (वास्तविक स्थिति) पद्धति से गणना।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

30 अप्रैल 2025 की तिथि क्या है?
30 अप्रैल 2025 को शुक्ल तृतीया तिथि 14:12 तक है, फिर शुक्ल चतुर्थी आरंभ होती है।
30 अप्रैल 2025 का नक्षत्र क्या है?
30 अप्रैल 2025 को नक्षत्र रोहिणी और योग शोभन है।
30 अप्रैल 2025 को सूर्योदय और सूर्यास्त कब है?
नई दिल्ली में सूर्योदय 05:41 पर और सूर्यास्त 18:55 पर है।
30 अप्रैल 2025 को राहु काल कब है?
नई दिल्ली में राहु काल 12:18 से 13:57 तक है। इस समय नए महत्त्वपूर्ण कार्य आरंभ नहीं किए जाते।