मुख्य सामग्री पर जाएँ

शनिवार, 1 अगस्त 2026

दैनिक पंचांग

कृष्ण पक्ष

शनिवार, कृष्ण पक्ष। तृतीया तिथि रात तक है, फिर चतुर्थी आरंभ होती है। तृतीया शुभ तिथि है, यात्रा और उत्सव के लिए अच्छी। चन्द्रमा शतभिषा नक्षत्र में रात तक है, फिर पूर्व भाद्रपदा में। नए कार्य के लिए अभिजित मुहूर्त 12:00 से 12:54 तक शुभ है; राहु काल 09:04 से 10:46 तक है, इसमें नया कार्य न करें। चन्द्रमा कुम्भ राशि में है और सूर्य कर्क राशि में।

तिथि · वार · चान्द्र मास

    • कृष्ण तृतीया

      पिछले दिन 22:32 से 23:07 तक

    • फिर

      कृष्ण चतुर्थी

      23:07 – अगले दिन 23:15

    तृतीया — सामान्यतः शुभ तिथि। यात्रा और उल्लासपूर्ण अवसरों के लिए उपयुक्त।

  • शनिवार

    शनिवार (स्वामी शनि) — अनुशासित और गंभीर दिन; अधूरे कार्य पूर्ण करने के लिए उपयुक्त, नए आरंभ के लिए कम।

  • अमान्तआषाढ़
    पूर्णिमान्तश्रावण

नक्षत्र · योग · करण

    • शतभिषा

      पिछले दिन 19:26 से 20:45 तक

    • फिर

      पूर्व भाद्रपदा

      20:45 – अगले दिन 21:37

    चर नक्षत्र — यात्रा, बदलाव और स्थान-परिवर्तन के लिए शुभ।

    • शोभन

      पिछले दिन 23:54 से 23:23 तक

    • फिर

      अतिगण्ड

      23:23 – अगले दिन 22:29

    शुभ योग — सूर्य और चन्द्रमा का संयोग अनुकूल है। अधिकांश नए आरंभ के लिए सहायक माना जाता है।

    • वणिज

      पिछले दिन 22:32 से 10:53 तक

    • फिर

      विष्टि

      10:53 – 23:07

    • फिर

      बव

      23:07 – अगले दिन 11:15

    चर करण — महीने भर दोहराए जाने वाले सात करणों में से एक; सामान्य कार्यों के लिए ठीक।

एक नज़र में दिन

मुख्य रूप से गुजरात, राजस्थान और उत्तर भारत में प्रचलित समय-प्रणाली: दिन की आठ और रात की आठ अवधियाँ, प्रत्येक शुभ, सामान्य या अशुभ चिह्नित। दैनिक कार्य का स्लॉट चुनने (या टालने) का त्वरित उपाय।

दक्षिण भारतीय परंपरा जिसमें दिन और रात को आठ-आठ गौरी अवधियों में बाँटा जाता है — दैनिक कार्यों के लिए शुभ समय चुनने में सहायक।

दिन के सात सबसे महत्त्वपूर्ण मुहूर्तों का संक्षिप्त संग्रह — तीन शुभ (ब्रह्म, अभिजित, अमृत) और चार अशुभ (राहु काल, यमगण्ड, गुलिक, वर्ज्यम्)। कुछ दिनों पर एक अवधि की गणना संभव न होने पर कम भी दिख सकते हैं।

दिन और रात प्रत्येक बारह होरा (ग्रह-घंटों) में बँटते हैं, हर एक का स्वामी ग्रह होता है। स्वामी ग्रह उस घंटे का स्वभाव तय करता है — कार्य के अनुकूल स्वामी वाला घंटा चुनें।

कृष्ण तृतीया · शनि

00061218काल · 05:42 – 07:23शुभ · 07:23 – 09:04रोग · 09:04 – 10:46उद्वेग · 10:46 – 12:27चल · 12:27 – 14:08लाभ · 14:08 – 15:49अमृत · 15:49 – 17:30काल · 17:30 – 19:12लाभ · 19:12 – 20:31उद्वेग · 20:31 – 21:49शुभ · 21:49 – 23:08अमृत · 23:08 – 00:27चल · 00:27 – 01:46रोग · 01:46 – 03:05काल · 03:05 – 04:24लाभ · 04:24 – 05:43चोर · 05:42 – 07:23उद्योग · 07:23 – 09:04विष · 09:04 – 10:46अमृत · 10:46 – 12:27रोग · 12:27 – 14:08लाभ · 14:08 – 15:49धन · 15:49 – 17:30सुख · 17:30 – 19:12लाभ · 19:12 – 20:31धन · 20:31 – 21:49सुख · 21:49 – 23:08चोर · 23:08 – 00:27उद्योग · 00:27 – 01:46विष · 01:46 – 03:05अमृत · 03:05 – 04:24रोग · 04:24 – 05:43ब्रह्म मुहूर्त · 04:18 – 05:00अभिजित मुहूर्त · 12:00 – 12:54अमृत काल · 13:09 – 14:51राहु काल · 09:04 – 10:46यमगण्ड काल · 14:08 – 15:49गुलिक काल · 05:42 – 07:23वर्ज्यम् · 03:23 – 05:02शनि · 05:42 – 06:50गुरु · 06:50 – 07:57मंगल · 07:57 – 09:04सूर्य · 09:04 – 10:12शुक्र · 10:12 – 11:19बुध · 11:19 – 12:27चंद्र · 12:27 – 13:34शनि · 13:34 – 14:42गुरु · 14:42 – 15:49मंगल · 15:49 – 16:57सूर्य · 16:57 – 18:04शुक्र · 18:04 – 19:12बुध · 19:12 – 20:04चंद्र · 20:04 – 20:57शनि · 20:57 – 21:49गुरु · 21:49 – 22:42मंगल · 22:42 – 23:35सूर्य · 23:35 – 00:27शुक्र · 00:27 – 01:20बुध · 01:20 – 02:12चंद्र · 02:12 – 03:05शनि · 03:05 – 03:57गुरु · 03:57 – 04:50मंगल · 04:50 – 05:43

1 अग॰

दैनिक पंचांग

दिन का चौघड़िया

8·1 घं 41 मि
05:42
07:23
09:04
10:46
12:27
14:08
15:49
17:30

रात का चौघड़िया

8·1 घं 19 मि
19:12
20:31
21:49
23:08
00:27
01:46
03:05
04:24

दिन का गौरी

8·1 घं 41 मि
05:42
07:23
09:04
10:46
12:27
14:08
15:49
17:30

रात का गौरी

8·1 घं 19 मि
19:12
20:31
21:49
23:08
00:27
01:46
03:05
04:24
04:18–05:00
12:00–12:54
13:09–14:51
09:04–10:46
14:08–15:49
05:42–07:23
03:23–05:02

दिन के होरा

12·1 घं 7 मि
05:42
06:50
07:57
09:04
10:12
11:19
12:27
13:34
14:42
15:49
16:57
18:04

रात के होरा

12·53 मि
19:12
20:04
20:57
21:49
22:42
23:35
00:27
01:20
02:12
03:05
03:57
04:50

लाहिरी अयनांश और दृक् गणित (वास्तविक स्थिति) पद्धति से गणना।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1 अगस्त 2026 की तिथि क्या है?
1 अगस्त 2026 को कृष्ण तृतीया तिथि 23:07 तक है, फिर कृष्ण चतुर्थी आरंभ होती है।
1 अगस्त 2026 का नक्षत्र क्या है?
1 अगस्त 2026 को नक्षत्र शतभिषा और योग शोभन है।
1 अगस्त 2026 को सूर्योदय और सूर्यास्त कब है?
नई दिल्ली में सूर्योदय 05:42 पर और सूर्यास्त 19:12 पर है।
1 अगस्त 2026 को राहु काल कब है?
नई दिल्ली में राहु काल 09:04 से 10:46 तक है। इस समय नए महत्त्वपूर्ण कार्य आरंभ नहीं किए जाते।