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मंगलवार, 17 अगस्त 2027

दैनिक पंचांग

शुक्ल पक्ष

मंगलवार, शुक्ल पक्ष। इस दिन रक्षाबंधन है। पूर्णिमा तिथि दोपहर तक है, फिर प्रतिपदा आरंभ होती है। चन्द्रमा धनिष्ठा नक्षत्र में अगले दिन तड़के तक है, फिर शतभिषा में। नए कार्य के लिए अभिजित मुहूर्त 11:58 से 12:51 तक शुभ है; राहु काल 15:42 से 17:20 तक है, इसमें नया कार्य न करें। चन्द्रमा मकर राशि में है और सूर्य कर्क राशि में।

इस दिन के पर्व

मंगलवार, 17 अगस्त

रक्षाबंधन

राखी पूर्णिमा

सुबह, भद्रा के बाद05:51 – 12:58

इस वर्ष तिथि के पहले दिन अपराह्न से रात तक भद्रा का साया है, इसलिए यह कर्म अगले दिन — इसी तारीख़ को — सूर्योदय के बाद, तिथि रहते, किया जाता है।

बहनें भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र (राखी) बाँधती हैं और भाई बहन की रक्षा का संकल्प लेते हैं। भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का उत्सव।

तिथि · वार · चान्द्र मास

    • पूर्णिमा

      पिछले दिन 10:29 से 12:58 तक

    • फिर

      कृष्ण प्रतिपदा

      12:58 – अगले दिन 15:16

    पूर्णिमा — पूर्ण चंद्र की तिथि। भक्ति, व्रत और आरंभ किए काम पूरे करने का दिन।

  • मंगलवार

    मंगलवार (स्वामी मंगल) — ऊर्जावान और साहसी दिन; कर्म और शारीरिक कार्य के लिए शुभ, संवेदनशील मामलों के लिए कम।

  • अमान्तश्रावण
    पूर्णिमान्तश्रावण

नक्षत्र · योग · करण

    • धनिष्ठा · पाद 1

      पिछले दिन 23:34 से अगले दिन 02:32 तक

    चर नक्षत्र — यात्रा, बदलाव और स्थान-परिवर्तन के लिए शुभ।

    • शोभन

      00:40 से अगले दिन 01:36 तक

    शुभ योग — सूर्य और चन्द्रमा का संयोग अनुकूल है। अधिकांश नए आरंभ के लिए सहायक माना जाता है।

    • बव

      पिछले दिन 23:44 से 12:58 तक

    • फिर

      बालव

      12:58 – अगले दिन 02:09

    चर करण — महीने भर दोहराए जाने वाले सात करणों में से एक; सामान्य कार्यों के लिए ठीक।

एक नज़र में दिन

मुख्य रूप से गुजरात, राजस्थान और उत्तर भारत में प्रचलित समय-प्रणाली: दिन की आठ और रात की आठ अवधियाँ, प्रत्येक शुभ, सामान्य या अशुभ चिह्नित। दैनिक कार्य का स्लॉट चुनने (या टालने) का त्वरित उपाय।

दक्षिण भारतीय परंपरा जिसमें दिन और रात को आठ-आठ गौरी अवधियों में बाँटा जाता है — दैनिक कार्यों के लिए शुभ समय चुनने में सहायक।

दिन के सात सबसे महत्त्वपूर्ण मुहूर्तों का संक्षिप्त संग्रह — तीन शुभ (ब्रह्म, अभिजित, अमृत) और चार अशुभ (राहु काल, यमगण्ड, गुलिक, वर्ज्यम्)। कुछ दिनों पर एक अवधि की गणना संभव न होने पर कम भी दिख सकते हैं।

दिन और रात प्रत्येक बारह होरा (ग्रह-घंटों) में बँटते हैं, हर एक का स्वामी ग्रह होता है। स्वामी ग्रह उस घंटे का स्वभाव तय करता है — कार्य के अनुकूल स्वामी वाला घंटा चुनें।

पूर्णिमा · मंगल

00061218रोग · 05:51 – 07:29उद्वेग · 07:29 – 09:08चल · 09:08 – 10:46लाभ · 10:46 – 12:25अमृत · 12:25 – 14:03काल · 14:03 – 15:42शुभ · 15:42 – 17:20रोग · 17:20 – 18:59काल · 18:59 – 20:20लाभ · 20:20 – 21:42उद्वेग · 21:42 – 23:03शुभ · 23:03 – 00:25अमृत · 00:25 – 01:47चल · 01:47 – 03:08रोग · 03:08 – 04:30काल · 04:30 – 05:51रोग · 05:51 – 07:29लाभ · 07:29 – 09:08धन · 09:08 – 10:46सुख · 10:46 – 12:25चोर · 12:25 – 14:03उद्योग · 14:03 – 15:42विष · 15:42 – 17:20अमृत · 17:20 – 18:59चोर · 18:59 – 20:20उद्योग · 20:20 – 21:42विष · 21:42 – 23:03अमृत · 23:03 – 00:25रोग · 00:25 – 01:47लाभ · 01:47 – 03:08धन · 03:08 – 04:30सुख · 04:30 – 05:51ब्रह्म मुहूर्त · 04:24 – 05:07अभिजित मुहूर्त · 11:58 – 12:51अमृत काल · 14:51 – 16:38राहु काल · 15:42 – 17:20यमगण्ड काल · 09:08 – 10:46गुलिक काल · 12:25 – 14:03वर्ज्यम् · 04:03 – 05:51मंगल · 05:51 – 06:56सूर्य · 06:56 – 08:02शुक्र · 08:02 – 09:08बुध · 09:08 – 10:13चंद्र · 10:13 – 11:19शनि · 11:19 – 12:25गुरु · 12:25 – 13:30मंगल · 13:30 – 14:36सूर्य · 14:36 – 15:42शुक्र · 15:42 – 16:47बुध · 16:47 – 17:53चंद्र · 17:53 – 18:59शनि · 18:59 – 19:53गुरु · 19:53 – 20:47मंगल · 20:47 – 21:42सूर्य · 21:42 – 22:36शुक्र · 22:36 – 23:31बुध · 23:31 – 00:25चंद्र · 00:25 – 01:19शनि · 01:19 – 02:14गुरु · 02:14 – 03:08मंगल · 03:08 – 04:03सूर्य · 04:03 – 04:57शुक्र · 04:57 – 05:51

17 अग॰

दैनिक पंचांग

दिन का चौघड़िया

8·1 घं 38 मि
05:51
07:29
09:08
10:46
12:25
14:03
15:42
17:20

रात का चौघड़िया

8·1 घं 22 मि
18:59
20:20
21:42
23:03
00:25
01:47
03:08
04:30

दिन का गौरी

8·1 घं 38 मि
05:51
07:29
09:08
10:46
12:25
14:03
15:42
17:20

रात का गौरी

8·1 घं 22 मि
18:59
20:20
21:42
23:03
00:25
01:47
03:08
04:30
04:24–05:07
11:58–12:51
14:51–16:38
15:42–17:20
09:08–10:46
12:25–14:03
04:03–05:51

दिन के होरा

12·1 घं 6 मि
05:51
06:56
08:02
09:08
10:13
11:19
12:25
13:30
14:36
15:42
16:47
17:53

रात के होरा

12·54 मि
18:59
19:53
20:47
21:42
22:36
23:31
00:25
01:19
02:14
03:08
04:03
04:57

लाहिरी अयनांश और दृक् गणित (वास्तविक स्थिति) पद्धति से गणना।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

17 अगस्त 2027 की तिथि क्या है?
17 अगस्त 2027 को पूर्णिमा तिथि 12:58 तक है, फिर कृष्ण प्रतिपदा आरंभ होती है।
17 अगस्त 2027 का नक्षत्र क्या है?
17 अगस्त 2027 को नक्षत्र धनिष्ठा और योग शोभन है।
17 अगस्त 2027 को सूर्योदय और सूर्यास्त कब है?
नई दिल्ली में सूर्योदय 05:51 पर और सूर्यास्त 18:59 पर है।
17 अगस्त 2027 को राहु काल कब है?
नई दिल्ली में राहु काल 15:42 से 17:20 तक है। इस समय नए महत्त्वपूर्ण कार्य आरंभ नहीं किए जाते।