सोमवार, कृष्ण पक्ष। इस दिन मासिक शिवरात्रि का व्रत है। चतुर्दशी तिथि अगले दिन तड़के तक है, फिर अमावस्या आरंभ होती है। चन्द्रमा विशाखा नक्षत्र में दोपहर तक है, फिर अनुराधा में। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है, नए कार्य के लिए शुभ। नए कार्य के लिए अभिजित मुहूर्त 11:51 से 12:33 तक शुभ है; राहु काल 08:18 से 09:36 तक है, इसमें नया कार्य न करें। चन्द्रमा तुला राशि में है और सूर्य वृश्चिक राशि में।
इस दिन के पर्व
सोमवार, 7 दिसंबर
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मासिक शिवरात्रि
व्रत
निशीथ काल23:45 – 00:40, 8 दिसंबर
पूजा निशीथ काल — मध्यरात्रि — में, चतुर्दशी रहते की जाती है।
हर कृष्ण चतुर्दशी को, जब तिथि मध्यरात्रि में हो, मनाई जाने वाली मासिक शिवरात्रि। भक्त दिन भर उपवास रखते हैं और निशीथ काल में शिवलिंग पर जल और बेलपत्र अर्पित करते हैं; माघ (उत्तर भारत में फाल्गुन) की शिवरात्रि ही महाशिवरात्रि है।
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पुरुषोत्तम मास
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अधिक कार्तिक
पवित्र चंद्र अधिक मास — उपवास, दान और भक्ति-साधना का काल।
तिथि · वार · चान्द्र मास
तिथिहिन्दू पंचांग का चान्द्र दिवस — सूर्य और चन्द्रमा के बीच की दूरी से मापा जाता है। पर्व ग्रेगोरियन तिथि के बजाय किसी विशेष तिथि (एकादशी, पूर्णिमा…) पर पड़ते हैं।शब्दावली में और जानें
कृष्ण चतुर्दशी
02:22सेअगले दिन04:12तक
चतुर्दशी — तीव्र और परिवर्तनकारी तिथि। बड़े निर्णय सावधानी से लेने चाहिए।
वारसप्ताह का दिन, जिसका शासक सात पारंपरिक ग्रहों में से एक होता है — रवि/सूर्य, सोम/चंद्र, और इसी क्रम में। प्रत्येक वार अपने स्वामी ग्रह का स्वभाव वहन करता है।शब्दावली में और जानें
सोमवार
सोमवार (स्वामी चन्द्रमा) — शांत और भावपूर्ण दिन; पारिवारिक कार्य, जल-सम्बन्धित कार्य और अध्ययन के लिए उपयुक्त।
चान्द्र मासहिन्दू चान्द्र पंचांग का मास। दो परंपराएँ साथ-साथ चलती हैं — अमान्त अमावस्या से, पूर्णिमान्त पूर्णिमा से आरंभ होती है — इसलिए क्षेत्र अनुसार एक ही मास के दो नाम होते हैं।शब्दावली में और जानें
अमान्तकार्तिक
पूर्णिमान्तमार्गशीर्ष
नक्षत्र · योग · करण
नक्षत्र27 नक्षत्रों में से वह नक्षत्र जिसमें चन्द्रमा स्थित है। प्रत्येक के अपने गुण होते हैं जो जन्म-कुंडली और शुभ मुहूर्त चुनने में उपयोग होते हैं।शब्दावली में और जानें
विशाखा
पिछले दिन13:38से15:48तक
फिर
अनुराधा
15:48–अगले दिन18:16
मिश्र नक्षत्र — मिली-जुली ऊर्जा; कार्य की प्रकृति दिन के अनुरूप चुनें।
योगसूर्य-चन्द्रमा का एक संयोग, जो दिन के स्वभाव को रंग देता है। 27 में से दो-तिहाई योग शुभ माने जाते हैं; नौ (विष्कुम्भ, अतिगण्ड, शूल, गण्ड, व्याघात, वज्र, व्यतीपात, परिघ, वैधृति) में संयम अपेक्षित है।शब्दावली में और जानें
अतिगण्ड
पिछले दिन07:41से07:46तक
फिर
सुकर्मा
07:46–अगले दिन08:06
अशुभ योग — सूर्य और चन्द्रमा का संयोग प्रतिकूल है। परंपरा में बड़े नए काम टाले जाते हैं।
करणतिथि का आधा भाग — हर चान्द्र दिवस में क्रमशः दो करण होते हैं। तिथि से अधिक सूक्ष्म समय-गणना के लिए उपयोगी।शब्दावली में और जानें
विष्टि
02:22से15:15तक
फिर
शकुनि
15:15–अगले दिन04:12
विष्टि (भद्रा) करण — महत्त्वपूर्ण नए कार्यों के लिए परंपरा में टाला जाता है; सामान्य कार्य चलते हैं।
एक नज़र में दिन
यहाँ आज पंचांग के समय खंड परिभाषित नहीं हैं
चौघड़िया, गौरी एवं राहु काल — सभी स्थानीय दिन-प्रकाश को आठ बराबर भागों में विभाजित करते हैं। बहुत उच्च अक्षांश (~66° से ऊपर) पर सूर्य दिन-भर डूबे या उगे रह सकता है, अतः इस तारीख़ के लिए स्थानीय सूर्योदय/सूर्यास्त की जोड़ी उपलब्ध नहीं है। ऊपर दी गई तिथि, नक्षत्र एवं योग की गणना यथावत मान्य है।
चौघड़ियामुख्य रूप से गुजरात, राजस्थान और उत्तर भारत में प्रचलित समय-प्रणाली: दिन की आठ और रात की आठ अवधियाँ, प्रत्येक शुभ, सामान्य या अशुभ चिह्नित। दैनिक कार्य का स्लॉट चुनने (या टालने) का त्वरित उपाय।शब्दावली में और जानें
मुख्य रूप से गुजरात, राजस्थान और उत्तर भारत में प्रचलित समय-प्रणाली: दिन की आठ और रात की आठ अवधियाँ, प्रत्येक शुभ, सामान्य या अशुभ चिह्नित। दैनिक कार्य का स्लॉट चुनने (या टालने) का त्वरित उपाय।
गौरी पंचांगम्दक्षिण भारतीय परंपरा जिसमें दिन और रात को आठ-आठ गौरी अवधियों में बाँटा जाता है — दैनिक कार्यों के लिए शुभ समय चुनने में सहायक।शब्दावली में और जानें
दक्षिण भारतीय परंपरा जिसमें दिन और रात को आठ-आठ गौरी अवधियों में बाँटा जाता है — दैनिक कार्यों के लिए शुभ समय चुनने में सहायक।
शुभ व अशुभदिन के सात सबसे महत्त्वपूर्ण मुहूर्तों का संक्षिप्त संग्रह — तीन शुभ (ब्रह्म, अभिजित, अमृत) और चार अशुभ (राहु काल, यमगण्ड, गुलिक, वर्ज्यम्)। कुछ दिनों पर एक अवधि की गणना संभव न होने पर कम भी दिख सकते हैं।शब्दावली में और जानें
दिन के सात सबसे महत्त्वपूर्ण मुहूर्तों का संक्षिप्त संग्रह — तीन शुभ (ब्रह्म, अभिजित, अमृत) और चार अशुभ (राहु काल, यमगण्ड, गुलिक, वर्ज्यम्)। कुछ दिनों पर एक अवधि की गणना संभव न होने पर कम भी दिख सकते हैं।
होरादिन और रात प्रत्येक बारह होरा (ग्रह-घंटों) में बँटते हैं, हर एक का स्वामी ग्रह होता है। स्वामी ग्रह उस घंटे का स्वभाव तय करता है — कार्य के अनुकूल स्वामी वाला घंटा चुनें।शब्दावली में और जानें
दिन और रात प्रत्येक बारह होरा (ग्रह-घंटों) में बँटते हैं, हर एक का स्वामी ग्रह होता है। स्वामी ग्रह उस घंटे का स्वभाव तय करता है — कार्य के अनुकूल स्वामी वाला घंटा चुनें।
कृष्ण चतुर्दशी · सोम
7 दिस॰
दैनिक पंचांग
शुभमिला-जुलाबचें
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दिन का चौघड़िया
8·1 घं 18 मि
अमृतअमृत — सर्वोत्तम चौघड़िया। किसी भी महत्त्वपूर्ण कार्य के लिए श्रेष्ठ।शब्दावली में और जानें