बुधवार, 10 फ़रवरी 2027
दैनिक पंचांग
बुधवार, शुक्ल पक्ष। चतुर्थी तिथि अगले दिन तड़के तक है, फिर पंचमी आरंभ होती है। चतुर्थी गणेश जी की तिथि है। यह पूजा के लिए अच्छी है, बड़े नए काम के लिए नहीं। चन्द्रमा उत्तर भाद्रपदा नक्षत्र में अगले दिन तड़के तक है, फिर रेवती में। राहु काल 12:35 से 13:58 तक है, इसमें नया कार्य न करें। चन्द्रमा मीन राशि में है और सूर्य मकर राशि में।
पुरुषोत्तम मास
अधिक माघ
पवित्र चंद्र अधिक मास — उपवास, दान और भक्ति-साधना का काल।
तिथि · वार · चान्द्र मास
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शुक्ल चतुर्थी
02:20 से अगले दिन 03:04 तक
चतुर्थी — गणेश को समर्पित। पूजा-पाठ और विघ्न निवारण के लिए श्रेष्ठ; बड़े नए कार्यों के लिए कम उपयुक्त।
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बुधवार
बुधवार (स्वामी बुध) — संवाद और बुद्धि का दिन; अध्ययन, लेखन और व्यापार के लिए शुभ।
- अमान्तमाघपूर्णिमान्तमाघ
नक्षत्र · योग · करण
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उत्तर भाद्रपदा · पाद 1
03:40 से अगले दिन 04:56 तक
स्थिर नक्षत्र — दीर्घकालिक संकल्प, नींव और स्थायी क्रय के लिए श्रेष्ठ।
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सिद्ध
पिछले दिन 21:43 से 21:13 तक
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फिर
साध्य
21:13 – अगले दिन 20:20
शुभ योग — सूर्य और चन्द्रमा का संयोग अनुकूल है। अधिकांश नए आरंभ के लिए सहायक माना जाता है।
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वणिज
02:20 से 14:46 तक
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फिर
विष्टि
14:46 – अगले दिन 03:04
चर करण — महीने भर दोहराए जाने वाले सात करणों में से एक; सामान्य कार्यों के लिए ठीक।
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एक नज़र में दिन
यहाँ आज पंचांग के समय खंड परिभाषित नहीं हैं
चौघड़िया, गौरी एवं राहु काल — सभी स्थानीय दिन-प्रकाश को आठ बराबर भागों में विभाजित करते हैं। बहुत उच्च अक्षांश (~66° से ऊपर) पर सूर्य दिन-भर डूबे या उगे रह सकता है, अतः इस तारीख़ के लिए स्थानीय सूर्योदय/सूर्यास्त की जोड़ी उपलब्ध नहीं है। ऊपर दी गई तिथि, नक्षत्र एवं योग की गणना यथावत मान्य है।
मुख्य रूप से गुजरात, राजस्थान और उत्तर भारत में प्रचलित समय-प्रणाली: दिन की आठ और रात की आठ अवधियाँ, प्रत्येक शुभ, सामान्य या अशुभ चिह्नित। दैनिक कार्य का स्लॉट चुनने (या टालने) का त्वरित उपाय।
दक्षिण भारतीय परंपरा जिसमें दिन और रात को आठ-आठ गौरी अवधियों में बाँटा जाता है — दैनिक कार्यों के लिए शुभ समय चुनने में सहायक।
दिन के सात सबसे महत्त्वपूर्ण मुहूर्तों का संक्षिप्त संग्रह — तीन शुभ (ब्रह्म, अभिजित, अमृत) और चार अशुभ (राहु काल, यमगण्ड, गुलिक, वर्ज्यम्)। कुछ दिनों पर एक अवधि की गणना संभव न होने पर कम भी दिख सकते हैं।
दिन और रात प्रत्येक बारह होरा (ग्रह-घंटों) में बँटते हैं, हर एक का स्वामी ग्रह होता है। स्वामी ग्रह उस घंटे का स्वभाव तय करता है — कार्य के अनुकूल स्वामी वाला घंटा चुनें।
शुक्ल चतुर्थी · बुध
10 फ़र॰
दैनिक पंचांग
दिन का चौघड़िया
8·1 घं 23 मि| 07:0308:26 | ||
| 08:2609:49 | ||
| 09:4911:12 | ||
| 11:1212:35 | ||
| 12:3513:58 | ||
| 13:5815:21 | ||
| 15:2116:44 | ||
| 16:4418:07 |
रात का चौघड़िया
8·1 घं 37 मि| 18:0719:44 | ||
| 19:4421:21 | ||
| 21:2122:58 | ||
| 22:5800:35 | ||
| 00:3502:12 | ||
| 02:1203:49 | ||
| 03:4905:26 | ||
| 05:2607:03 |
दिन का गौरी
8·1 घं 23 मि| 07:0308:26 | ||
| 08:2609:49 | ||
| 09:4911:12 | ||
| 11:1212:35 | ||
| 12:3513:58 | ||
| 13:5815:21 | ||
| 15:2116:44 | ||
| 16:4418:07 |
रात का गौरी
8·1 घं 37 मि| 18:0719:44 | ||
| 19:4421:21 | ||
| 21:2122:58 | ||
| 22:5800:35 | ||
| 00:3502:12 | ||
| 02:1203:49 | ||
| 03:4905:26 | ||
| 05:2607:03 |
| 05:20–06:11 | ||
| 23:53–01:34 | ||
| 12:35–13:58 | ||
| 08:26–09:49 | ||
| 11:12–12:35 | ||
| 13:46–15:27 |
दिन के होरा
12·55 मि| 07:0307:59 | ||
| 07:5908:54 | ||
| 08:5409:49 | ||
| 09:4910:44 | ||
| 10:4411:40 | ||
| 11:4012:35 | ||
| 12:3513:30 | ||
| 13:3014:26 | ||
| 14:2615:21 | ||
| 15:2116:16 | ||
| 16:1617:11 | ||
| 17:1118:07 |
रात के होरा
12·1 घं 5 मि| 18:0719:11 | ||
| 19:1120:16 | ||
| 20:1621:21 | ||
| 21:2122:25 | ||
| 22:2523:30 | ||
| 23:3000:35 | ||
| 00:3501:39 | ||
| 01:3902:44 | ||
| 02:4403:49 | ||
| 03:4904:53 | ||
| 04:5305:58 | ||
| 05:5807:03 |
लाहिरी अयनांश और दृक् गणित (वास्तविक स्थिति) पद्धति से गणना।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- 10 फ़रवरी 2027 की तिथि क्या है?
- 10 फ़रवरी 2027 को शुक्ल चतुर्थी तिथि 11 फ़रवरी 03:04 तक है, फिर शुक्ल पंचमी आरंभ होती है।
- 10 फ़रवरी 2027 का नक्षत्र क्या है?
- 10 फ़रवरी 2027 को नक्षत्र उत्तर भाद्रपदा और योग सिद्ध है।
- 10 फ़रवरी 2027 को सूर्योदय और सूर्यास्त कब है?
- नई दिल्ली में सूर्योदय 07:03 पर और सूर्यास्त 18:07 पर है।
- 10 फ़रवरी 2027 को राहु काल कब है?
- नई दिल्ली में राहु काल 12:35 से 13:58 तक है। इस समय नए महत्त्वपूर्ण कार्य आरंभ नहीं किए जाते।



