वसंत पंचमी
पूर्वाह्न07:00 – 12:10
सरस्वती पूजन पूर्वाह्न में, पंचमी तिथि रहते किया जाता है।
ज्ञान, संगीत और कला की देवी सरस्वती को समर्पित। विद्यार्थी पुस्तकें और वाद्ययंत्र देवी के सामने रखते हैं; वसंत के आगमन में पीले वस्त्र पहने जाते हैं।
दैनिक पंचांग
बुधवार, शुक्ल पक्ष। इस दिन वसंत पंचमी है। पंचमी तिथि दोपहर तक है, फिर षष्ठी आरंभ होती है। चन्द्रमा रेवती नक्षत्र में सुबह तक है, फिर अश्विनी में। राहु काल 12:35 से 13:59 तक है, इसमें नया कार्य न करें। चन्द्रमा मीन राशि में है और सूर्य कुम्भ राशि में।
पूर्वाह्न07:00 – 12:10
सरस्वती पूजन पूर्वाह्न में, पंचमी तिथि रहते किया जाता है।
ज्ञान, संगीत और कला की देवी सरस्वती को समर्पित। विद्यार्थी पुस्तकें और वाद्ययंत्र देवी के सामने रखते हैं; वसंत के आगमन में पीले वस्त्र पहने जाते हैं।
अधिक माघ
पवित्र चंद्र अधिक मास — उपवास, दान और भक्ति-साधना का काल।
शुक्ल पंचमी
पिछले दिन 14:42 से 12:10 तक
शुक्ल षष्ठी
12:10 – अगले दिन 10:13
पंचमी — शांति और सामंजस्य की तिथि। अध्ययन, संगीत और कला के लिए शुभ।
बुधवार
बुधवार (स्वामी बुध) — संवाद और बुद्धि का दिन; अध्ययन, लेखन और व्यापार के लिए शुभ।
रेवती
पिछले दिन 12:35 से 10:43 तक
अश्विनी
10:43 – अगले दिन 09:25
मृदु नक्षत्र — संगीत, मैत्री और चिकित्सा जैसी कोमल गतिविधियों के लिए शुभ।
शुभ
पिछले दिन 23:04 से 19:58 तक
शुक्ल
19:58 – अगले दिन 17:22
शुभ योग — सूर्य और चन्द्रमा का संयोग अनुकूल है। अधिकांश नए आरंभ के लिए सहायक माना जाता है।
बालव
01:22 से 12:10 तक
कौलव
12:10 – 23:07
तैतिल
23:07 – अगले दिन 10:13
चर करण — महीने भर दोहराए जाने वाले सात करणों में से एक; सामान्य कार्यों के लिए ठीक।
यहाँ आज पंचांग के समय खंड परिभाषित नहीं हैं
चौघड़िया, गौरी एवं राहु काल — सभी स्थानीय दिन-प्रकाश को आठ बराबर भागों में विभाजित करते हैं। बहुत उच्च अक्षांश (~66° से ऊपर) पर सूर्य दिन-भर डूबे या उगे रह सकता है, अतः इस तारीख़ के लिए स्थानीय सूर्योदय/सूर्यास्त की जोड़ी उपलब्ध नहीं है। ऊपर दी गई तिथि, नक्षत्र एवं योग की गणना यथावत मान्य है।
मुख्य रूप से गुजरात, राजस्थान और उत्तर भारत में प्रचलित समय-प्रणाली: दिन की आठ और रात की आठ अवधियाँ, प्रत्येक शुभ, सामान्य या अशुभ चिह्नित। दैनिक कार्य का स्लॉट चुनने (या टालने) का त्वरित उपाय।
दक्षिण भारतीय परंपरा जिसमें दिन और रात को आठ-आठ गौरी अवधियों में बाँटा जाता है — दैनिक कार्यों के लिए शुभ समय चुनने में सहायक।
दिन के सात सबसे महत्त्वपूर्ण मुहूर्तों का संक्षिप्त संग्रह — तीन शुभ (ब्रह्म, अभिजित, अमृत) और चार अशुभ (राहु काल, यमगण्ड, गुलिक, वर्ज्यम्)। कुछ दिनों पर एक अवधि की गणना संभव न होने पर कम भी दिख सकते हैं।
दिन और रात प्रत्येक बारह होरा (ग्रह-घंटों) में बँटते हैं, हर एक का स्वामी ग्रह होता है। स्वामी ग्रह उस घंटे का स्वभाव तय करता है — कार्य के अनुकूल स्वामी वाला घंटा चुनें।
शुक्ल पंचमी · बुध
14 फ़र॰
दैनिक पंचांग
दिन का चौघड़िया
8·1 घं 24 मि| 07:0008:24 | ||
| 08:2409:48 | ||
| 09:4811:11 | ||
| 11:1112:35 | ||
| 12:3513:59 | ||
| 13:5915:22 | ||
| 15:2216:46 | ||
| 16:4618:10 |
रात का चौघड़िया
8·1 घं 36 मि| 18:1019:46 | ||
| 19:4621:22 | ||
| 21:2222:58 | ||
| 22:5800:35 | ||
| 00:3502:11 | ||
| 02:1103:47 | ||
| 03:4705:23 | ||
| 05:2307:00 |
दिन का गौरी
8·1 घं 24 मि| 07:0008:24 | ||
| 08:2409:48 | ||
| 09:4811:11 | ||
| 11:1112:35 | ||
| 12:3513:59 | ||
| 13:5915:22 | ||
| 15:2216:46 | ||
| 16:4618:10 |
रात का गौरी
8·1 घं 36 मि| 18:1019:46 | ||
| 19:4621:22 | ||
| 21:2222:58 | ||
| 22:5800:35 | ||
| 00:3502:11 | ||
| 02:1103:47 | ||
| 03:4705:23 | ||
| 05:2307:00 |
| 05:18–06:09 | ||
| 08:30–09:58 | ||
| 12:35–13:59 | ||
| 08:24–09:48 | ||
| 11:11–12:35 | ||
| 05:38–07:09 |
दिन के होरा
12·56 मि| 07:0007:56 | ||
| 07:5608:52 | ||
| 08:5209:48 | ||
| 09:4810:43 | ||
| 10:4311:39 | ||
| 11:3912:35 | ||
| 12:3513:31 | ||
| 13:3114:27 | ||
| 14:2715:22 | ||
| 15:2216:18 | ||
| 16:1817:14 | ||
| 17:1418:10 |
रात के होरा
12·1 घं 4 मि| 18:1019:14 | ||
| 19:1420:18 | ||
| 20:1821:22 | ||
| 21:2222:26 | ||
| 22:2623:30 | ||
| 23:3000:35 | ||
| 00:3501:39 | ||
| 01:3902:43 | ||
| 02:4303:47 | ||
| 03:4704:51 | ||
| 04:5105:55 | ||
| 05:5507:00 |
लाहिरी अयनांश और दृक् गणित (वास्तविक स्थिति) पद्धति से गणना।
KundliGPT का उपयोग कैसे होता है, यह समझने और इसे बेहतर बनाने के लिए हम कुकीज़ का उपयोग करते हैं। गोपनीयता नीति ·