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शनिवार, 21 फ़रवरी 2026

दैनिक पंचांग

शुक्ल पक्ष

शनिवार, शुक्ल पक्ष। चतुर्थी तिथि दोपहर तक है, फिर पंचमी आरंभ होती है। चतुर्थी गणेश जी की तिथि है। यह पूजा के लिए अच्छी है, बड़े नए काम के लिए नहीं। चन्द्रमा रेवती नक्षत्र में रात तक है, फिर अश्विनी में। नए कार्य के लिए अभिजित मुहूर्त 12:12 से 12:57 तक शुभ है; राहु काल 09:44 से 11:09 तक है, इसमें नया कार्य न करें। चन्द्रमा मीन राशि में है और सूर्य कुम्भ राशि में।

तिथि · वार · चान्द्र मास

    • शुक्ल चतुर्थी

      पिछले दिन 14:38 से 13:01 तक

    • फिर

      शुक्ल पंचमी

      13:01 – अगले दिन 11:10

    चतुर्थी — गणेश को समर्पित। पूजा-पाठ और विघ्न निवारण के लिए श्रेष्ठ; बड़े नए कार्यों के लिए कम उपयुक्त।

  • शनिवार

    शनिवार (स्वामी शनि) — अनुशासित और गंभीर दिन; अधूरे कार्य पूर्ण करने के लिए उपयुक्त, नए आरंभ के लिए कम।

  • अमान्तफाल्गुन
    पूर्णिमान्तफाल्गुन

नक्षत्र · योग · करण

    • रेवती

      पिछले दिन 20:07 से 19:07 तक

    • फिर

      अश्विनी

      19:07 – अगले दिन 17:54

    मृदु नक्षत्र — संगीत, मैत्री और चिकित्सा जैसी कोमल गतिविधियों के लिए शुभ।

    • शुभ

      पिछले दिन 18:23 से 15:51 तक

    • फिर

      शुक्ल

      15:51 – अगले दिन 13:08

    शुभ योग — सूर्य और चन्द्रमा का संयोग अनुकूल है। अधिकांश नए आरंभ के लिए सहायक माना जाता है।

    • विष्टि

      01:51 से 13:01 तक

    • फिर

      बव

      13:01 – अगले दिन 00:07

    विष्टि (भद्रा) करण — महत्त्वपूर्ण नए कार्यों के लिए परंपरा में टाला जाता है; सामान्य कार्य चलते हैं।

एक नज़र में दिन

मुख्य रूप से गुजरात, राजस्थान और उत्तर भारत में प्रचलित समय-प्रणाली: दिन की आठ और रात की आठ अवधियाँ, प्रत्येक शुभ, सामान्य या अशुभ चिह्नित। दैनिक कार्य का स्लॉट चुनने (या टालने) का त्वरित उपाय।

दक्षिण भारतीय परंपरा जिसमें दिन और रात को आठ-आठ गौरी अवधियों में बाँटा जाता है — दैनिक कार्यों के लिए शुभ समय चुनने में सहायक।

दिन के सात सबसे महत्त्वपूर्ण मुहूर्तों का संक्षिप्त संग्रह — तीन शुभ (ब्रह्म, अभिजित, अमृत) और चार अशुभ (राहु काल, यमगण्ड, गुलिक, वर्ज्यम्)। कुछ दिनों पर एक अवधि की गणना संभव न होने पर कम भी दिख सकते हैं।

दिन और रात प्रत्येक बारह होरा (ग्रह-घंटों) में बँटते हैं, हर एक का स्वामी ग्रह होता है। स्वामी ग्रह उस घंटे का स्वभाव तय करता है — कार्य के अनुकूल स्वामी वाला घंटा चुनें।

शुक्ल चतुर्थी · शनि

00061218काल · 06:54 – 08:19शुभ · 08:19 – 09:44रोग · 09:44 – 11:09उद्वेग · 11:09 – 12:34चल · 12:34 – 14:00लाभ · 14:00 – 15:25अमृत · 15:25 – 16:50काल · 16:50 – 18:15लाभ · 18:15 – 19:50उद्वेग · 19:50 – 21:25शुभ · 21:25 – 22:59अमृत · 22:59 – 00:34चल · 00:34 – 02:09रोग · 02:09 – 03:43काल · 03:43 – 05:18लाभ · 05:18 – 06:53चोर · 06:54 – 08:19उद्योग · 08:19 – 09:44विष · 09:44 – 11:09अमृत · 11:09 – 12:34रोग · 12:34 – 14:00लाभ · 14:00 – 15:25धन · 15:25 – 16:50सुख · 16:50 – 18:15लाभ · 18:15 – 19:50धन · 19:50 – 21:25सुख · 21:25 – 22:59चोर · 22:59 – 00:34उद्योग · 00:34 – 02:09विष · 02:09 – 03:43अमृत · 03:43 – 05:18रोग · 05:18 – 06:53ब्रह्म मुहूर्त · 05:13 – 06:03अभिजित मुहूर्त · 12:12 – 12:57अमृत काल · 16:49 – 18:21राहु काल · 09:44 – 11:09यमगण्ड काल · 14:00 – 15:25गुलिक काल · 06:54 – 08:19वर्ज्यम् · 07:37 – 09:09शनि · 06:54 – 07:51गुरु · 07:51 – 08:47मंगल · 08:47 – 09:44सूर्य · 09:44 – 10:41शुक्र · 10:41 – 11:38बुध · 11:38 – 12:34चंद्र · 12:34 – 13:31शनि · 13:31 – 14:28गुरु · 14:28 – 15:25मंगल · 15:25 – 16:21सूर्य · 16:21 – 17:18शुक्र · 17:18 – 18:15बुध · 18:15 – 19:18चंद्र · 19:18 – 20:21शनि · 20:21 – 21:25गुरु · 21:25 – 22:28मंगल · 22:28 – 23:31सूर्य · 23:31 – 00:34शुक्र · 00:34 – 01:37बुध · 01:37 – 02:40चंद्र · 02:40 – 03:43शनि · 03:43 – 04:47गुरु · 04:47 – 05:50मंगल · 05:50 – 06:53

21 फ़र॰

दैनिक पंचांग

दिन का चौघड़िया

8·1 घं 25 मि
06:54
08:19
09:44
11:09
12:34
14:00
15:25
16:50

रात का चौघड़िया

8·1 घं 35 मि
18:15
19:50
21:25
22:59
00:34
02:09
03:43
05:18

दिन का गौरी

8·1 घं 25 मि
06:54
08:19
09:44
11:09
12:34
14:00
15:25
16:50

रात का गौरी

8·1 घं 35 मि
18:15
19:50
21:25
22:59
00:34
02:09
03:43
05:18
05:13–06:03
12:12–12:57
16:49–18:21
09:44–11:09
14:00–15:25
06:54–08:19
07:37–09:09

दिन के होरा

12·57 मि
06:54
07:51
08:47
09:44
10:41
11:38
12:34
13:31
14:28
15:25
16:21
17:18

रात के होरा

12·1 घं 3 मि
18:15
19:18
20:21
21:25
22:28
23:31
00:34
01:37
02:40
03:43
04:47
05:50

लाहिरी अयनांश और दृक् गणित (वास्तविक स्थिति) पद्धति से गणना।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

21 फ़रवरी 2026 की तिथि क्या है?
21 फ़रवरी 2026 को शुक्ल चतुर्थी तिथि 13:01 तक है, फिर शुक्ल पंचमी आरंभ होती है।
21 फ़रवरी 2026 का नक्षत्र क्या है?
21 फ़रवरी 2026 को नक्षत्र रेवती और योग शुभ है।
21 फ़रवरी 2026 को सूर्योदय और सूर्यास्त कब है?
नई दिल्ली में सूर्योदय 06:54 पर और सूर्यास्त 18:15 पर है।
21 फ़रवरी 2026 को राहु काल कब है?
नई दिल्ली में राहु काल 09:44 से 11:09 तक है। इस समय नए महत्त्वपूर्ण कार्य आरंभ नहीं किए जाते।