गुरु पूर्णिमा
व्यास पूर्णिमा
जिस दिन सूर्योदय के समय यह तिथि हो, उसी दिन पर्व — पूरे दिन मनाया जाता है।
गुरु और शिक्षकों के सम्मान का दिन। भक्त अपने गुरुजनों को प्रणाम करते हैं और वेदव्यास का स्मरण करते हैं।
दैनिक पंचांग
गुरुवार, शुक्ल पक्ष। इस दिन गुरु पूर्णिमा है। पूर्णिमा तिथि अगले दिन तड़के तक है, फिर प्रतिपदा आरंभ होती है। चन्द्रमा पूर्व आषाढ़ा नक्षत्र में अगले दिन तड़के तक है, फिर उत्तर आषाढ़ा में। नए कार्य के लिए अभिजित मुहूर्त 11:58 से 12:54 तक शुभ है; राहु काल 14:10 से 15:54 तक है, इसमें नया कार्य न करें। चन्द्रमा धनु राशि में है और सूर्य मिथुन राशि में।
व्यास पूर्णिमा
जिस दिन सूर्योदय के समय यह तिथि हो, उसी दिन पर्व — पूरे दिन मनाया जाता है।
गुरु और शिक्षकों के सम्मान का दिन। भक्त अपने गुरुजनों को प्रणाम करते हैं और वेदव्यास का स्मरण करते हैं।
अधिक आषाढ़
पवित्र चंद्र अधिक मास — उपवास, दान और भक्ति-साधना का काल।
पूर्णिमा
01:37 से अगले दिन 02:06 तक
पूर्णिमा — पूर्ण चंद्र की तिथि। भक्ति, व्रत और आरंभ किए काम पूरे करने का दिन।
गुरुवार
गुरुवार (स्वामी गुरु/बृहस्पति) — सप्ताह का सबसे शुभ दिन; अध्ययन, संस्कार और नए आरंभ के लिए श्रेष्ठ।
पूर्व आषाढ़ा · पाद 1
04:49 से अगले दिन 05:56 तक
उग्र नक्षत्र — बड़े नए आरंभ के लिए परंपरा में टाला जाता है; पूर्णता और परिवर्तन के कार्यों के लिए उपयुक्त।
ऐन्द्र
पिछले दिन 22:08 से 21:37 तक
वैधृति
21:37 – अगले दिन 20:44
शुभ योग — सूर्य और चन्द्रमा का संयोग अनुकूल है। अधिकांश नए आरंभ के लिए सहायक माना जाता है।
विष्टि
01:37 से 13:55 तक
बव
13:55 – अगले दिन 02:06
विष्टि (भद्रा) करण — महत्त्वपूर्ण नए कार्यों के लिए परंपरा में टाला जाता है; सामान्य कार्य चलते हैं।
यहाँ आज पंचांग के समय खंड परिभाषित नहीं हैं
चौघड़िया, गौरी एवं राहु काल — सभी स्थानीय दिन-प्रकाश को आठ बराबर भागों में विभाजित करते हैं। बहुत उच्च अक्षांश (~66° से ऊपर) पर सूर्य दिन-भर डूबे या उगे रह सकता है, अतः इस तारीख़ के लिए स्थानीय सूर्योदय/सूर्यास्त की जोड़ी उपलब्ध नहीं है। ऊपर दी गई तिथि, नक्षत्र एवं योग की गणना यथावत मान्य है।
मुख्य रूप से गुजरात, राजस्थान और उत्तर भारत में प्रचलित समय-प्रणाली: दिन की आठ और रात की आठ अवधियाँ, प्रत्येक शुभ, सामान्य या अशुभ चिह्नित। दैनिक कार्य का स्लॉट चुनने (या टालने) का त्वरित उपाय।
दक्षिण भारतीय परंपरा जिसमें दिन और रात को आठ-आठ गौरी अवधियों में बाँटा जाता है — दैनिक कार्यों के लिए शुभ समय चुनने में सहायक।
दिन के सात सबसे महत्त्वपूर्ण मुहूर्तों का संक्षिप्त संग्रह — तीन शुभ (ब्रह्म, अभिजित, अमृत) और चार अशुभ (राहु काल, यमगण्ड, गुलिक, वर्ज्यम्)। कुछ दिनों पर एक अवधि की गणना संभव न होने पर कम भी दिख सकते हैं।
दिन और रात प्रत्येक बारह होरा (ग्रह-घंटों) में बँटते हैं, हर एक का स्वामी ग्रह होता है। स्वामी ग्रह उस घंटे का स्वभाव तय करता है — कार्य के अनुकूल स्वामी वाला घंटा चुनें।
पूर्णिमा · गुरु
10 जुल॰
दैनिक पंचांग
दिन का चौघड़िया
8·1 घं 44 मि| 05:3007:14 | ||
| 07:1408:58 | ||
| 08:5810:42 | ||
| 10:4212:26 | ||
| 12:2614:10 | ||
| 14:1015:54 | ||
| 15:5417:38 | ||
| 17:3819:22 |
रात का चौघड़िया
8·1 घं 16 मि| 19:2220:38 | ||
| 20:3821:54 | ||
| 21:5423:10 | ||
| 23:1000:26 | ||
| 00:2601:42 | ||
| 01:4202:59 | ||
| 02:5904:15 | ||
| 04:1505:31 |
दिन का गौरी
8·1 घं 44 मि| 05:3007:14 | ||
| 07:1408:58 | ||
| 08:5810:42 | ||
| 10:4212:26 | ||
| 12:2614:10 | ||
| 14:1015:54 | ||
| 15:5417:38 | ||
| 17:3819:22 |
रात का गौरी
8·1 घं 16 मि| 19:2220:38 | ||
| 20:3821:54 | ||
| 21:5423:10 | ||
| 23:1000:26 | ||
| 00:2601:42 | ||
| 01:4202:59 | ||
| 02:5904:15 | ||
| 04:1505:31 |
| 04:09–04:50 | ||
| 11:58–12:54 | ||
| 00:54–02:35 | ||
| 14:10–15:54 | ||
| 05:30–07:14 | ||
| 08:58–10:42 | ||
| 14:52–16:32 |
दिन के होरा
12·1 घं 9 मि| 05:3006:40 | ||
| 06:4007:49 | ||
| 07:4908:58 | ||
| 08:5810:07 | ||
| 10:0711:17 | ||
| 11:1712:26 | ||
| 12:2613:35 | ||
| 13:3514:45 | ||
| 14:4515:54 | ||
| 15:5417:03 | ||
| 17:0318:12 | ||
| 18:1219:22 |
रात के होरा
12·51 मि| 19:2220:12 | ||
| 20:1221:03 | ||
| 21:0321:54 | ||
| 21:5422:45 | ||
| 22:4523:35 | ||
| 23:3500:26 | ||
| 00:2601:17 | ||
| 01:1702:08 | ||
| 02:0802:59 | ||
| 02:5903:49 | ||
| 03:4904:40 | ||
| 04:4005:31 |
लाहिरी अयनांश और दृक् गणित (वास्तविक स्थिति) पद्धति से गणना।
KundliGPT का उपयोग कैसे होता है, यह समझने और इसे बेहतर बनाने के लिए हम कुकीज़ का उपयोग करते हैं। गोपनीयता नीति ·