बुधवार, 26 नवंबर 2025
दैनिक पंचांग
बुधवार, शुक्ल पक्ष। षष्ठी तिथि अगले दिन तड़के तक है, फिर सप्तमी आरंभ होती है। षष्ठी बल की तिथि है, कठिन काम पूरे करने के लिए अच्छी। चन्द्रमा श्रवण नक्षत्र में अगले दिन तड़के तक है, फिर धनिष्ठा में। राहु काल 12:08 से 13:27 तक है, इसमें नया कार्य न करें। चन्द्रमा मकर राशि में है और सूर्य वृश्चिक राशि में।
पुरुषोत्तम मास
अधिक मार्गशीर्ष
पवित्र चंद्र अधिक मास — उपवास, दान और भक्ति-साधना का काल।
तिथि · वार · चान्द्र मास
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शुक्ल षष्ठी
पिछले दिन 22:57 से अगले दिन 00:02 तक
षष्ठी — साहस और बल की तिथि। कठिन कार्यों को पूर्ण करने के लिए उपयुक्त।
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बुधवार
बुधवार (स्वामी बुध) — संवाद और बुद्धि का दिन; अध्ययन, लेखन और व्यापार के लिए शुभ।
- अमान्तमार्गशीर्षपूर्णिमान्तमार्गशीर्ष
नक्षत्र · योग · करण
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श्रवण · पाद 2
पिछले दिन 23:57 से अगले दिन 01:32 तक
चर नक्षत्र — यात्रा, बदलाव और स्थान-परिवर्तन के लिए शुभ।
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वृद्धि
पिछले दिन 12:49 से 12:42 तक
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फिर
ध्रुव
12:42 – अगले दिन 12:09
शुभ योग — सूर्य और चन्द्रमा का संयोग अनुकूल है। अधिकांश नए आरंभ के लिए सहायक माना जाता है।
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कौलव
पिछले दिन 22:57 से 11:34 तक
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फिर
तैतिल
11:34 – अगले दिन 00:02
चर करण — महीने भर दोहराए जाने वाले सात करणों में से एक; सामान्य कार्यों के लिए ठीक।
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एक नज़र में दिन
यहाँ आज पंचांग के समय खंड परिभाषित नहीं हैं
चौघड़िया, गौरी एवं राहु काल — सभी स्थानीय दिन-प्रकाश को आठ बराबर भागों में विभाजित करते हैं। बहुत उच्च अक्षांश (~66° से ऊपर) पर सूर्य दिन-भर डूबे या उगे रह सकता है, अतः इस तारीख़ के लिए स्थानीय सूर्योदय/सूर्यास्त की जोड़ी उपलब्ध नहीं है। ऊपर दी गई तिथि, नक्षत्र एवं योग की गणना यथावत मान्य है।
मुख्य रूप से गुजरात, राजस्थान और उत्तर भारत में प्रचलित समय-प्रणाली: दिन की आठ और रात की आठ अवधियाँ, प्रत्येक शुभ, सामान्य या अशुभ चिह्नित। दैनिक कार्य का स्लॉट चुनने (या टालने) का त्वरित उपाय।
दक्षिण भारतीय परंपरा जिसमें दिन और रात को आठ-आठ गौरी अवधियों में बाँटा जाता है — दैनिक कार्यों के लिए शुभ समय चुनने में सहायक।
दिन के सात सबसे महत्त्वपूर्ण मुहूर्तों का संक्षिप्त संग्रह — तीन शुभ (ब्रह्म, अभिजित, अमृत) और चार अशुभ (राहु काल, यमगण्ड, गुलिक, वर्ज्यम्)। कुछ दिनों पर एक अवधि की गणना संभव न होने पर कम भी दिख सकते हैं।
दिन और रात प्रत्येक बारह होरा (ग्रह-घंटों) में बँटते हैं, हर एक का स्वामी ग्रह होता है। स्वामी ग्रह उस घंटे का स्वभाव तय करता है — कार्य के अनुकूल स्वामी वाला घंटा चुनें।
शुक्ल षष्ठी · बुध
26 नव॰
दैनिक पंचांग
दिन का चौघड़िया
8·1 घं 19 मि| 06:5208:11 | ||
| 08:1109:30 | ||
| 09:3010:49 | ||
| 10:4912:08 | ||
| 12:0813:27 | ||
| 13:2714:46 | ||
| 14:4616:05 | ||
| 16:0517:24 |
रात का चौघड़िया
8·1 घं 41 मि| 17:2419:05 | ||
| 19:0520:46 | ||
| 20:4622:27 | ||
| 22:2700:08 | ||
| 00:0801:49 | ||
| 01:4903:31 | ||
| 03:3105:12 | ||
| 05:1206:53 |
दिन का गौरी
8·1 घं 19 मि| 06:5208:11 | ||
| 08:1109:30 | ||
| 09:3010:49 | ||
| 10:4912:08 | ||
| 12:0813:27 | ||
| 13:2714:46 | ||
| 14:4616:05 | ||
| 16:0517:24 |
रात का गौरी
8·1 घं 41 मि| 17:2419:05 | ||
| 19:0520:46 | ||
| 20:4622:27 | ||
| 22:2700:08 | ||
| 00:0801:49 | ||
| 01:4903:31 | ||
| 03:3105:12 | ||
| 05:1206:53 |
| 05:04–05:58 | ||
| 14:27–16:10 | ||
| 12:08–13:27 | ||
| 08:11–09:30 | ||
| 10:49–12:08 | ||
| 05:42–07:22 |
दिन के होरा
12·53 मि| 06:5207:45 | ||
| 07:4508:37 | ||
| 08:3709:30 | ||
| 09:3010:23 | ||
| 10:2311:15 | ||
| 11:1512:08 | ||
| 12:0813:01 | ||
| 13:0113:53 | ||
| 13:5314:46 | ||
| 14:4615:38 | ||
| 15:3816:31 | ||
| 16:3117:24 |
रात के होरा
12·1 घं 7 मि| 17:2418:31 | ||
| 18:3119:39 | ||
| 19:3920:46 | ||
| 20:4621:53 | ||
| 21:5323:01 | ||
| 23:0100:08 | ||
| 00:0801:16 | ||
| 01:1602:23 | ||
| 02:2303:31 | ||
| 03:3104:38 | ||
| 04:3805:45 | ||
| 05:4506:53 |
लाहिरी अयनांश और दृक् गणित (वास्तविक स्थिति) पद्धति से गणना।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- 26 नवंबर 2025 की तिथि क्या है?
- 26 नवंबर 2025 को शुक्ल षष्ठी तिथि 27 नवंबर 00:02 तक है, फिर शुक्ल सप्तमी आरंभ होती है।
- 26 नवंबर 2025 का नक्षत्र क्या है?
- 26 नवंबर 2025 को नक्षत्र श्रवण और योग वृद्धि है।
- 26 नवंबर 2025 को सूर्योदय और सूर्यास्त कब है?
- नई दिल्ली में सूर्योदय 06:52 पर और सूर्यास्त 17:24 पर है।
- 26 नवंबर 2025 को राहु काल कब है?
- नई दिल्ली में राहु काल 12:08 से 13:27 तक है। इस समय नए महत्त्वपूर्ण कार्य आरंभ नहीं किए जाते।



