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गुरुवार, 4 नवंबर 2027

दैनिक पंचांग

शुक्ल पक्ष

गुरुवार, शुक्ल पक्ष। इस दिन छठ पूजा है। षष्ठी तिथि रात तक है, फिर सप्तमी आरंभ होती है। चन्द्रमा पूर्व आषाढ़ा नक्षत्र में दोपहर तक है, फिर उत्तर आषाढ़ा में। नए कार्य के लिए अभिजित मुहूर्त 11:42 से 12:26 तक शुभ है; राहु काल 13:26 से 14:49 तक है, इसमें नया कार्य न करें। चन्द्रमा धनु राशि में है और सूर्य तुला राशि में।

इस दिन के पर्व

गुरुवार, 4 नवंबर

छठ पूजा

सूर्य षष्ठी

संध्या अर्घ्य अस्त होते सूर्य को और उषा अर्घ्य अगले सूर्योदय को दिया जाता है; व्रत बीच में निरंतर चलता है।

बिहारझारखंडपूर्वांचल

सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित चार दिवसीय पर्व। भक्त कठोर उपवास रखते हैं और नदी या तालाब के तट पर अस्तगामी एवं उगते सूर्य को अर्घ्य देते हैं।

तिथि · वार · चान्द्र मास

    • शुक्ल षष्ठी

      पिछले दिन 19:32 से 21:38 तक

    • फिर

      शुक्ल सप्तमी

      21:38 – अगले दिन 00:09

    षष्ठी — साहस और बल की तिथि। कठिन कार्यों को पूर्ण करने के लिए उपयुक्त।

  • गुरुवार

    गुरुवार (स्वामी गुरु/बृहस्पति) — सप्ताह का सबसे शुभ दिन; अध्ययन, संस्कार और नए आरंभ के लिए श्रेष्ठ।

  • अमान्तकार्तिक
    पूर्णिमान्तकार्तिक

नक्षत्र · योग · करण

    • पूर्व आषाढ़ा

      पिछले दिन 12:57 से 15:25 तक

    • फिर

      उत्तर आषाढ़ा

      15:25 – अगले दिन 18:19

    उग्र नक्षत्र — बड़े नए आरंभ के लिए परंपरा में टाला जाता है; पूर्णता और परिवर्तन के कार्यों के लिए उपयुक्त।

    • धृति

      पिछले दिन 19:30 से 20:02 तक

    • फिर

      शूल

      20:02 – अगले दिन 20:54

    शुभ योग — सूर्य और चन्द्रमा का संयोग अनुकूल है। अधिकांश नए आरंभ के लिए सहायक माना जाता है।

    • कौलव

      पिछले दिन 19:32 से 08:31 तक

    • फिर

      तैतिल

      08:31 – 21:38

    • फिर

      गर

      21:38 – अगले दिन 10:51

    चर करण — महीने भर दोहराए जाने वाले सात करणों में से एक; सामान्य कार्यों के लिए ठीक।

एक नज़र में दिन

मुख्य रूप से गुजरात, राजस्थान और उत्तर भारत में प्रचलित समय-प्रणाली: दिन की आठ और रात की आठ अवधियाँ, प्रत्येक शुभ, सामान्य या अशुभ चिह्नित। दैनिक कार्य का स्लॉट चुनने (या टालने) का त्वरित उपाय।

दक्षिण भारतीय परंपरा जिसमें दिन और रात को आठ-आठ गौरी अवधियों में बाँटा जाता है — दैनिक कार्यों के लिए शुभ समय चुनने में सहायक।

दिन के सात सबसे महत्त्वपूर्ण मुहूर्तों का संक्षिप्त संग्रह — तीन शुभ (ब्रह्म, अभिजित, अमृत) और चार अशुभ (राहु काल, यमगण्ड, गुलिक, वर्ज्यम्)। कुछ दिनों पर एक अवधि की गणना संभव न होने पर कम भी दिख सकते हैं।

दिन और रात प्रत्येक बारह होरा (ग्रह-घंटों) में बँटते हैं, हर एक का स्वामी ग्रह होता है। स्वामी ग्रह उस घंटे का स्वभाव तय करता है — कार्य के अनुकूल स्वामी वाला घंटा चुनें।

शुक्ल षष्ठी · गुरु

00061218शुभ · 06:34 – 07:57रोग · 07:57 – 09:19उद्वेग · 09:19 – 10:42चल · 10:42 – 12:04लाभ · 12:04 – 13:26अमृत · 13:26 – 14:49काल · 14:49 – 16:11शुभ · 16:11 – 17:34अमृत · 17:34 – 19:11चल · 19:11 – 20:49रोग · 20:49 – 22:27काल · 22:27 – 00:04लाभ · 00:04 – 01:42उद्वेग · 01:42 – 03:20शुभ · 03:20 – 04:57अमृत · 04:57 – 06:35धन · 06:34 – 07:57सुख · 07:57 – 09:19चोर · 09:19 – 10:42उद्योग · 10:42 – 12:04अमृत · 12:04 – 13:26विष · 13:26 – 14:49रोग · 14:49 – 16:11लाभ · 16:11 – 17:34अमृत · 17:34 – 19:11विष · 19:11 – 20:49रोग · 20:49 – 22:27लाभ · 22:27 – 00:04धन · 00:04 – 01:42सुख · 01:42 – 03:20चोर · 03:20 – 04:57उद्योग · 04:57 – 06:35ब्रह्म मुहूर्त · 04:50 – 05:42अभिजित मुहूर्त · 11:42 – 12:26अमृत काल · 10:07 – 11:53राहु काल · 13:26 – 14:49यमगण्ड काल · 06:34 – 07:57गुलिक काल · 09:19 – 10:42वर्ज्यम् · 00:23 – 02:11गुरु · 06:34 – 07:29मंगल · 07:29 – 08:24सूर्य · 08:24 – 09:19शुक्र · 09:19 – 10:14बुध · 10:14 – 11:09चंद्र · 11:09 – 12:04शनि · 12:04 – 12:59गुरु · 12:59 – 13:54मंगल · 13:54 – 14:49सूर्य · 14:49 – 15:44शुक्र · 15:44 – 16:39बुध · 16:39 – 17:34चंद्र · 17:34 – 18:39शनि · 18:39 – 19:44गुरु · 19:44 – 20:49मंगल · 20:49 – 21:54सूर्य · 21:54 – 22:59शुक्र · 22:59 – 00:04बुध · 00:04 – 01:10चंद्र · 01:10 – 02:15शनि · 02:15 – 03:20गुरु · 03:20 – 04:25मंगल · 04:25 – 05:30सूर्य · 05:30 – 06:35

4 नव॰

दैनिक पंचांग

दिन का चौघड़िया

8·1 घं 22 मि
06:34
07:57
09:19
10:42
12:04
13:26
14:49
16:11

रात का चौघड़िया

8·1 घं 38 मि
17:34
19:11
20:49
22:27
00:04
01:42
03:20
04:57

दिन का गौरी

8·1 घं 22 मि
06:34
07:57
09:19
10:42
12:04
13:26
14:49
16:11

रात का गौरी

8·1 घं 38 मि
17:34
19:11
20:49
22:27
00:04
01:42
03:20
04:57
04:50–05:42
11:42–12:26
10:07–11:53
13:26–14:49
06:34–07:57
09:19–10:42
00:23–02:11

दिन के होरा

12·55 मि
06:34
07:29
08:24
09:19
10:14
11:09
12:04
12:59
13:54
14:49
15:44
16:39

रात के होरा

12·1 घं 5 मि
17:34
18:39
19:44
20:49
21:54
22:59
00:04
01:10
02:15
03:20
04:25
05:30

लाहिरी अयनांश और दृक् गणित (वास्तविक स्थिति) पद्धति से गणना।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

4 नवंबर 2027 की तिथि क्या है?
4 नवंबर 2027 को शुक्ल षष्ठी तिथि 21:38 तक है, फिर शुक्ल सप्तमी आरंभ होती है।
4 नवंबर 2027 का नक्षत्र क्या है?
4 नवंबर 2027 को नक्षत्र पूर्व आषाढ़ा और योग धृति है।
4 नवंबर 2027 को सूर्योदय और सूर्यास्त कब है?
नई दिल्ली में सूर्योदय 06:34 पर और सूर्यास्त 17:34 पर है।
4 नवंबर 2027 को राहु काल कब है?
नई दिल्ली में राहु काल 13:26 से 14:49 तक है। इस समय नए महत्त्वपूर्ण कार्य आरंभ नहीं किए जाते।