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मंगलवार, 1 अप्रैल 2025

दैनिक पंचांग

शुक्ल पक्ष

मंगलवार, शुक्ल पक्ष। चतुर्थी तिथि अगले दिन तड़के तक है, फिर पंचमी आरंभ होती है। चतुर्थी गणेश जी की तिथि है। यह पूजा के लिए अच्छी है, बड़े नए काम के लिए नहीं। चन्द्रमा भरणी नक्षत्र में सुबह तक है, फिर कृत्तिका में। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है, नए कार्य के लिए शुभ। नए कार्य के लिए अभिजित मुहूर्त 12:00 से 12:50 तक शुभ है; राहु काल 15:32 से 17:05 तक है, इसमें नया कार्य न करें। चन्द्रमा मेष राशि में है और सूर्य मीन राशि में।

तिथि · वार · चान्द्र मास

    • शुक्ल चतुर्थी

      05:42 से अगले दिन 02:32 तक

    चतुर्थी — गणेश को समर्पित। पूजा-पाठ और विघ्न निवारण के लिए श्रेष्ठ; बड़े नए कार्यों के लिए कम उपयुक्त।

  • मंगलवार

    मंगलवार (स्वामी मंगल) — ऊर्जावान और साहसी दिन; कर्म और शारीरिक कार्य के लिए शुभ, संवेदनशील मामलों के लिए कम।

  • अमान्तचैत्र
    पूर्णिमान्तचैत्र

नक्षत्र · योग · करण

    • भरणी

      पिछले दिन 13:45 से 11:06 तक

    • फिर

      कृत्तिका

      11:06 – अगले दिन 08:49

    उग्र नक्षत्र — बड़े नए आरंभ के लिए परंपरा में टाला जाता है; पूर्णता और परिवर्तन के कार्यों के लिए उपयुक्त।

    • विष्कुम्भ

      पिछले दिन 13:45 से 09:47 तक

    • फिर

      प्रीति

      09:47 – अगले दिन 06:07

    अशुभ योग — सूर्य और चन्द्रमा का संयोग प्रतिकूल है। परंपरा में बड़े नए काम टाले जाते हैं।

    • वणिज

      05:42 से 16:04 तक

    • फिर

      विष्टि

      16:04 – अगले दिन 02:32

    चर करण — महीने भर दोहराए जाने वाले सात करणों में से एक; सामान्य कार्यों के लिए ठीक।

एक नज़र में दिन

मुख्य रूप से गुजरात, राजस्थान और उत्तर भारत में प्रचलित समय-प्रणाली: दिन की आठ और रात की आठ अवधियाँ, प्रत्येक शुभ, सामान्य या अशुभ चिह्नित। दैनिक कार्य का स्लॉट चुनने (या टालने) का त्वरित उपाय।

दक्षिण भारतीय परंपरा जिसमें दिन और रात को आठ-आठ गौरी अवधियों में बाँटा जाता है — दैनिक कार्यों के लिए शुभ समय चुनने में सहायक।

दिन के सात सबसे महत्त्वपूर्ण मुहूर्तों का संक्षिप्त संग्रह — तीन शुभ (ब्रह्म, अभिजित, अमृत) और चार अशुभ (राहु काल, यमगण्ड, गुलिक, वर्ज्यम्)। कुछ दिनों पर एक अवधि की गणना संभव न होने पर कम भी दिख सकते हैं।

दिन और रात प्रत्येक बारह होरा (ग्रह-घंटों) में बँटते हैं, हर एक का स्वामी ग्रह होता है। स्वामी ग्रह उस घंटे का स्वभाव तय करता है — कार्य के अनुकूल स्वामी वाला घंटा चुनें।

शुक्ल चतुर्थी · मंगल

00061218रोग · 06:11 – 07:44उद्वेग · 07:44 – 09:18चल · 09:18 – 10:51लाभ · 10:51 – 12:25अमृत · 12:25 – 13:58काल · 13:58 – 15:32शुभ · 15:32 – 17:05रोग · 17:05 – 18:39काल · 18:39 – 20:05लाभ · 20:05 – 21:31उद्वेग · 21:31 – 22:58शुभ · 22:58 – 00:24अमृत · 00:24 – 01:51चल · 01:51 – 03:17रोग · 03:17 – 04:43काल · 04:43 – 06:10रोग · 06:11 – 07:44लाभ · 07:44 – 09:18धन · 09:18 – 10:51सुख · 10:51 – 12:25चोर · 12:25 – 13:58उद्योग · 13:58 – 15:32विष · 15:32 – 17:05अमृत · 17:05 – 18:39चोर · 18:39 – 20:05उद्योग · 20:05 – 21:31विष · 21:31 – 22:58अमृत · 22:58 – 00:24रोग · 00:24 – 01:51लाभ · 01:51 – 03:17धन · 03:17 – 04:43सुख · 04:43 – 06:10ब्रह्म मुहूर्त · 04:38 – 05:25अभिजित मुहूर्त · 12:00 – 12:50अमृत काल · 06:50 – 08:15राहु काल · 15:32 – 17:05यमगण्ड काल · 09:18 – 10:51गुलिक काल · 12:25 – 13:58वर्ज्यम् · 21:58 – 23:25मंगल · 06:11 – 07:13सूर्य · 07:13 – 08:15शुक्र · 08:15 – 09:18बुध · 09:18 – 10:20चंद्र · 10:20 – 11:22शनि · 11:22 – 12:25गुरु · 12:25 – 13:27मंगल · 13:27 – 14:29सूर्य · 14:29 – 15:32शुक्र · 15:32 – 16:34बुध · 16:34 – 17:36चंद्र · 17:36 – 18:39शनि · 18:39 – 19:36गुरु · 19:36 – 20:34मंगल · 20:34 – 21:31सूर्य · 21:31 – 22:29शुक्र · 22:29 – 23:27बुध · 23:27 – 00:24चंद्र · 00:24 – 01:22शनि · 01:22 – 02:19गुरु · 02:19 – 03:17मंगल · 03:17 – 04:14सूर्य · 04:14 – 05:12शुक्र · 05:12 – 06:10

1 अप्रैल

दैनिक पंचांग

दिन का चौघड़िया

8·1 घं 33 मि
06:11
07:44
09:18
10:51
12:25
13:58
15:32
17:05

रात का चौघड़िया

8·1 घं 26 मि
18:39
20:05
21:31
22:58
00:24
01:51
03:17
04:43

दिन का गौरी

8·1 घं 33 मि
06:11
07:44
09:18
10:51
12:25
13:58
15:32
17:05

रात का गौरी

8·1 घं 26 मि
18:39
20:05
21:31
22:58
00:24
01:51
03:17
04:43
04:38–05:25
12:00–12:50
06:50–08:15
15:32–17:05
09:18–10:51
12:25–13:58
21:58–23:25

दिन के होरा

12·1 घं 2 मि
06:11
07:13
08:15
09:18
10:20
11:22
12:25
13:27
14:29
15:32
16:34
17:36

रात के होरा

12·58 मि
18:39
19:36
20:34
21:31
22:29
23:27
00:24
01:22
02:19
03:17
04:14
05:12

लाहिरी अयनांश और दृक् गणित (वास्तविक स्थिति) पद्धति से गणना।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1 अप्रैल 2025 की तिथि क्या है?
1 अप्रैल 2025 को शुक्ल चतुर्थी तिथि 2 अप्रैल 02:32 तक है, फिर शुक्ल पंचमी आरंभ होती है।
1 अप्रैल 2025 का नक्षत्र क्या है?
1 अप्रैल 2025 को नक्षत्र भरणी और योग विष्कुम्भ है।
1 अप्रैल 2025 को सूर्योदय और सूर्यास्त कब है?
नई दिल्ली में सूर्योदय 06:11 पर और सूर्यास्त 18:39 पर है।
1 अप्रैल 2025 को राहु काल कब है?
नई दिल्ली में राहु काल 15:32 से 17:05 तक है। इस समय नए महत्त्वपूर्ण कार्य आरंभ नहीं किए जाते।