बुधवार, 23 अप्रैल 2025
दैनिक पंचांग
बुधवार, कृष्ण पक्ष। दशमी तिथि शाम तक है, फिर वरूथिनी एकादशी आरंभ होती है। दशमी स्थिर तिथि है, अधिकतर कामों के लिए शुभ। चन्द्रमा धनिष्ठा नक्षत्र में दोपहर तक है, फिर शतभिषा में। राहु काल 12:19 से 13:57 तक है, इसमें नया कार्य न करें। चन्द्रमा कुम्भ राशि में है और सूर्य मेष राशि में।
पुरुषोत्तम मास
अधिक चैत्र
पवित्र चंद्र अधिक मास — उपवास, दान और भक्ति-साधना का काल।
तिथि · वार · चान्द्र मास
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कृष्ण दशमी
पिछले दिन 18:13 से 16:43 तक
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फिर
वरूथिनी एकादशी
16:43 – अगले दिन 14:32
दशमी — स्थिर और भरोसेमंद तिथि। अधिकांश कार्यों के लिए शुभ मानी जाती है।
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बुधवार
बुधवार (स्वामी बुध) — संवाद और बुद्धि का दिन; अध्ययन, लेखन और व्यापार के लिए शुभ।
- अमान्तचैत्रपूर्णिमान्तवैशाख
नक्षत्र · योग · करण
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धनिष्ठा
पिछले दिन 12:44 से 12:07 तक
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फिर
शतभिषा
12:07 – अगले दिन 10:49
चर नक्षत्र — यात्रा, बदलाव और स्थान-परिवर्तन के लिए शुभ।
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शुक्ल
पिछले दिन 21:13 से 18:51 तक
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फिर
ब्रह्म
18:51 – अगले दिन 15:55
शुभ योग — सूर्य और चन्द्रमा का संयोग अनुकूल है। अधिकांश नए आरंभ के लिए सहायक माना जाता है।
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विष्टि
05:33 से 16:43 तक
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फिर
बव
16:43 – अगले दिन 03:43
विष्टि (भद्रा) करण — महत्त्वपूर्ण नए कार्यों के लिए परंपरा में टाला जाता है; सामान्य कार्य चलते हैं।
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एक नज़र में दिन
यहाँ आज पंचांग के समय खंड परिभाषित नहीं हैं
चौघड़िया, गौरी एवं राहु काल — सभी स्थानीय दिन-प्रकाश को आठ बराबर भागों में विभाजित करते हैं। बहुत उच्च अक्षांश (~66° से ऊपर) पर सूर्य दिन-भर डूबे या उगे रह सकता है, अतः इस तारीख़ के लिए स्थानीय सूर्योदय/सूर्यास्त की जोड़ी उपलब्ध नहीं है। ऊपर दी गई तिथि, नक्षत्र एवं योग की गणना यथावत मान्य है।
मुख्य रूप से गुजरात, राजस्थान और उत्तर भारत में प्रचलित समय-प्रणाली: दिन की आठ और रात की आठ अवधियाँ, प्रत्येक शुभ, सामान्य या अशुभ चिह्नित। दैनिक कार्य का स्लॉट चुनने (या टालने) का त्वरित उपाय।
दक्षिण भारतीय परंपरा जिसमें दिन और रात को आठ-आठ गौरी अवधियों में बाँटा जाता है — दैनिक कार्यों के लिए शुभ समय चुनने में सहायक।
दिन के सात सबसे महत्त्वपूर्ण मुहूर्तों का संक्षिप्त संग्रह — तीन शुभ (ब्रह्म, अभिजित, अमृत) और चार अशुभ (राहु काल, यमगण्ड, गुलिक, वर्ज्यम्)। कुछ दिनों पर एक अवधि की गणना संभव न होने पर कम भी दिख सकते हैं।
दिन और रात प्रत्येक बारह होरा (ग्रह-घंटों) में बँटते हैं, हर एक का स्वामी ग्रह होता है। स्वामी ग्रह उस घंटे का स्वभाव तय करता है — कार्य के अनुकूल स्वामी वाला घंटा चुनें।
कृष्ण दशमी · बुध
23 अप्रैल
दैनिक पंचांग
दिन का चौघड़िया
8·1 घं 38 मि| 05:4707:25 | ||
| 07:2509:03 | ||
| 09:0310:41 | ||
| 10:4112:19 | ||
| 12:1913:57 | ||
| 13:5715:35 | ||
| 15:3517:13 | ||
| 17:1318:51 |
रात का चौघड़िया
8·1 घं 22 मि| 18:5120:13 | ||
| 20:1321:35 | ||
| 21:3522:57 | ||
| 22:5700:19 | ||
| 00:1901:41 | ||
| 01:4103:02 | ||
| 03:0204:24 | ||
| 04:2405:46 |
दिन का गौरी
8·1 घं 38 मि| 05:4707:25 | ||
| 07:2509:03 | ||
| 09:0310:41 | ||
| 10:4112:19 | ||
| 12:1913:57 | ||
| 13:5715:35 | ||
| 15:3517:13 | ||
| 17:1318:51 |
रात का गौरी
8·1 घं 22 मि| 18:5120:13 | ||
| 20:1321:35 | ||
| 21:3522:57 | ||
| 22:5700:19 | ||
| 00:1901:41 | ||
| 01:4103:02 | ||
| 03:0204:24 | ||
| 04:2405:46 |
| 04:20–05:03 | ||
| 04:00–05:31 | ||
| 12:19–13:57 | ||
| 07:25–09:03 | ||
| 10:41–12:19 | ||
| 18:56–20:26 |
दिन के होरा
12·1 घं 5 मि| 05:4706:53 | ||
| 06:5307:58 | ||
| 07:5809:03 | ||
| 09:0310:09 | ||
| 10:0911:14 | ||
| 11:1412:19 | ||
| 12:1913:24 | ||
| 13:2414:30 | ||
| 14:3015:35 | ||
| 15:3516:40 | ||
| 16:4017:46 | ||
| 17:4618:51 |
रात के होरा
12·55 मि| 18:5119:46 | ||
| 19:4620:40 | ||
| 20:4021:35 | ||
| 21:3522:29 | ||
| 22:2923:24 | ||
| 23:2400:19 | ||
| 00:1901:13 | ||
| 01:1302:08 | ||
| 02:0803:02 | ||
| 03:0203:57 | ||
| 03:5704:52 | ||
| 04:5205:46 |
लाहिरी अयनांश और दृक् गणित (वास्तविक स्थिति) पद्धति से गणना।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- 23 अप्रैल 2025 की तिथि क्या है?
- 23 अप्रैल 2025 को कृष्ण दशमी तिथि 16:43 तक है, फिर वरूथिनी एकादशी आरंभ होती है।
- 23 अप्रैल 2025 का नक्षत्र क्या है?
- 23 अप्रैल 2025 को नक्षत्र धनिष्ठा और योग शुक्ल है।
- 23 अप्रैल 2025 को सूर्योदय और सूर्यास्त कब है?
- नई दिल्ली में सूर्योदय 05:47 पर और सूर्यास्त 18:51 पर है।
- 23 अप्रैल 2025 को राहु काल कब है?
- नई दिल्ली में राहु काल 12:19 से 13:57 तक है। इस समय नए महत्त्वपूर्ण कार्य आरंभ नहीं किए जाते।



