राम नवमी
मध्याह्न11:08 – 13:39
श्रीराम का जन्म मध्याह्न में हुआ, इसलिए पूजा और जन्मोत्सव मध्याह्न काल में मनाया जाता है।
भगवान विष्णु के सातवें अवतार श्रीराम का जन्मोत्सव। रामायण पाठ, मंदिर दर्शन और भजन-कीर्तन के साथ मनाया जाता है।
दैनिक पंचांग
रविवार, शुक्ल पक्ष। इस दिन राम नवमी है। नवमी तिथि रात तक है, फिर दशमी आरंभ होती है। चन्द्रमा पुष्य नक्षत्र में अगले दिन सुबह तक है, फिर आश्लेषा में। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है, नए कार्य के लिए शुभ। नए कार्य के लिए अभिजित मुहूर्त 11:58 से 12:48 तक शुभ है; राहु काल 17:07 से 18:41 तक है, इसमें नया कार्य न करें। चन्द्रमा कर्क राशि में है और सूर्य मीन राशि में।
मध्याह्न11:08 – 13:39
श्रीराम का जन्म मध्याह्न में हुआ, इसलिए पूजा और जन्मोत्सव मध्याह्न काल में मनाया जाता है।
भगवान विष्णु के सातवें अवतार श्रीराम का जन्मोत्सव। रामायण पाठ, मंदिर दर्शन और भजन-कीर्तन के साथ मनाया जाता है।
अधिक चैत्र
पवित्र चंद्र अधिक मास — उपवास, दान और भक्ति-साधना का काल।
शुक्ल नवमी
पिछले दिन 19:26 से 19:23 तक
शुक्ल दशमी
19:23 – अगले दिन 20:00
नवमी — दुर्गा को समर्पित। साधना के लिए श्रेष्ठ; बड़े नए कार्य परंपरा में टाले जाते हैं।
रविवार
रविवार (स्वामी सूर्य) — तेज और नेतृत्व का दिन; नेतृत्व कार्य और स्वास्थ्य के लिए शुभ।
पुष्य · पाद 1
05:32 से अगले दिन 06:24 तक
लघु नक्षत्र — संक्षिप्त कार्य, छोटी यात्राएँ और संवाद के लिए उपयुक्त।
सुकर्मा
पिछले दिन 20:03 से 18:55 तक
धृति
18:55 – अगले दिन 18:18
शुभ योग — सूर्य और चन्द्रमा का संयोग अनुकूल है। अधिकांश नए आरंभ के लिए सहायक माना जाता है।
बालव
पिछले दिन 19:26 से 07:19 तक
कौलव
07:19 – 19:23
तैतिल
19:23 – अगले दिन 07:37
चर करण — महीने भर दोहराए जाने वाले सात करणों में से एक; सामान्य कार्यों के लिए ठीक।
यहाँ आज पंचांग के समय खंड परिभाषित नहीं हैं
चौघड़िया, गौरी एवं राहु काल — सभी स्थानीय दिन-प्रकाश को आठ बराबर भागों में विभाजित करते हैं। बहुत उच्च अक्षांश (~66° से ऊपर) पर सूर्य दिन-भर डूबे या उगे रह सकता है, अतः इस तारीख़ के लिए स्थानीय सूर्योदय/सूर्यास्त की जोड़ी उपलब्ध नहीं है। ऊपर दी गई तिथि, नक्षत्र एवं योग की गणना यथावत मान्य है।
मुख्य रूप से गुजरात, राजस्थान और उत्तर भारत में प्रचलित समय-प्रणाली: दिन की आठ और रात की आठ अवधियाँ, प्रत्येक शुभ, सामान्य या अशुभ चिह्नित। दैनिक कार्य का स्लॉट चुनने (या टालने) का त्वरित उपाय।
दक्षिण भारतीय परंपरा जिसमें दिन और रात को आठ-आठ गौरी अवधियों में बाँटा जाता है — दैनिक कार्यों के लिए शुभ समय चुनने में सहायक।
दिन के सात सबसे महत्त्वपूर्ण मुहूर्तों का संक्षिप्त संग्रह — तीन शुभ (ब्रह्म, अभिजित, अमृत) और चार अशुभ (राहु काल, यमगण्ड, गुलिक, वर्ज्यम्)। कुछ दिनों पर एक अवधि की गणना संभव न होने पर कम भी दिख सकते हैं।
दिन और रात प्रत्येक बारह होरा (ग्रह-घंटों) में बँटते हैं, हर एक का स्वामी ग्रह होता है। स्वामी ग्रह उस घंटे का स्वभाव तय करता है — कार्य के अनुकूल स्वामी वाला घंटा चुनें।
शुक्ल नवमी · रवि
6 अप्रैल
दैनिक पंचांग
दिन का चौघड़िया
8·1 घं 35 मि| 06:0507:40 | ||
| 07:4009:14 | ||
| 09:1410:49 | ||
| 10:4912:23 | ||
| 12:2313:58 | ||
| 13:5815:32 | ||
| 15:3217:07 | ||
| 17:0718:41 |
रात का चौघड़िया
8·1 घं 25 मि| 18:4120:07 | ||
| 20:0721:32 | ||
| 21:3222:57 | ||
| 22:5700:23 | ||
| 00:2301:48 | ||
| 01:4803:13 | ||
| 03:1304:39 | ||
| 04:3906:04 |
दिन का गौरी
8·1 घं 35 मि| 06:0507:40 | ||
| 07:4009:14 | ||
| 09:1410:49 | ||
| 10:4912:23 | ||
| 12:2313:58 | ||
| 13:5815:32 | ||
| 15:3217:07 | ||
| 17:0718:41 |
रात का गौरी
8·1 घं 25 मि| 18:4120:07 | ||
| 20:0721:32 | ||
| 21:3222:57 | ||
| 22:5700:23 | ||
| 00:2301:48 | ||
| 01:4803:13 | ||
| 03:1304:39 | ||
| 04:3906:04 |
| 04:34–05:19 | ||
| 11:58–12:48 | ||
| 23:46–01:26 | ||
| 17:07–18:41 | ||
| 12:23–13:58 | ||
| 15:32–17:07 | ||
| 13:49–15:29 |
दिन के होरा
12·1 घं 3 मि| 06:0507:08 | ||
| 07:0808:11 | ||
| 08:1109:14 | ||
| 09:1410:17 | ||
| 10:1711:20 | ||
| 11:2012:23 | ||
| 12:2313:26 | ||
| 13:2614:29 | ||
| 14:2915:32 | ||
| 15:3216:35 | ||
| 16:3517:38 | ||
| 17:3818:41 |
रात के होरा
12·57 मि| 18:4119:38 | ||
| 19:3820:35 | ||
| 20:3521:32 | ||
| 21:3222:29 | ||
| 22:2923:26 | ||
| 23:2600:23 | ||
| 00:2301:20 | ||
| 01:2002:16 | ||
| 02:1603:13 | ||
| 03:1304:10 | ||
| 04:1005:07 | ||
| 05:0706:04 |
लाहिरी अयनांश और दृक् गणित (वास्तविक स्थिति) पद्धति से गणना।
KundliGPT का उपयोग कैसे होता है, यह समझने और इसे बेहतर बनाने के लिए हम कुकीज़ का उपयोग करते हैं। गोपनीयता नीति ·