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सोमवार, 10 अगस्त 2026

दैनिक पंचांग

कृष्ण पक्ष

सोमवार, कृष्ण पक्ष। द्वादशी तिथि सुबह तक है, फिर त्रयोदशी आरंभ होती है। द्वादशी पर एकादशी का व्रत खोला जाता है। यह शांत और विश्राम की तिथि है। चन्द्रमा आर्द्रा नक्षत्र में दोपहर तक है, फिर पुनर्वसु में। नए कार्य के लिए अभिजित मुहूर्त 11:59 से 12:52 तक शुभ है; राहु काल 07:27 से 09:06 तक है, इसमें नया कार्य न करें। चन्द्रमा मिथुन राशि में है और सूर्य कर्क राशि में।

तिथि · वार · चान्द्र मास

    • कृष्ण द्वादशी

      पिछले दिन 11:05 से 08:01 तक

    • फिर

      कृष्ण त्रयोदशी

      08:01 – अगले दिन 04:54

    द्वादशी — एकादशी व्रत की समाप्ति। शांत और पुनःस्थापन की तिथि।

  • सोमवार

    सोमवार (स्वामी चन्द्रमा) — शांत और भावपूर्ण दिन; पारिवारिक कार्य, जल-सम्बन्धित कार्य और अध्ययन के लिए उपयुक्त।

  • अमान्तआषाढ़
    पूर्णिमान्तश्रावण

नक्षत्र · योग · करण

    • आर्द्रा

      पिछले दिन 14:43 से 12:26 तक

    • फिर

      पुनर्वसु

      12:26 – अगले दिन 10:09

    तीक्ष्ण नक्षत्र — निर्णायक कार्य, चिकित्सकीय हस्तक्षेप और एकाग्र शक्ति वाले कार्य के लिए उपयुक्त।

    • वज्र

      02:04 से 22:26 तक

    • फिर

      सिद्धि

      22:26 – अगले दिन 18:51

    अशुभ योग — सूर्य और चन्द्रमा का संयोग प्रतिकूल है। परंपरा में बड़े नए काम टाले जाते हैं।

    • तैतिल

      पिछले दिन 21:34 से 08:01 तक

    • फिर

      गर

      08:01 – 18:27

    • फिर

      वणिज

      18:27 – अगले दिन 04:54

    चर करण — महीने भर दोहराए जाने वाले सात करणों में से एक; सामान्य कार्यों के लिए ठीक।

एक नज़र में दिन

मुख्य रूप से गुजरात, राजस्थान और उत्तर भारत में प्रचलित समय-प्रणाली: दिन की आठ और रात की आठ अवधियाँ, प्रत्येक शुभ, सामान्य या अशुभ चिह्नित। दैनिक कार्य का स्लॉट चुनने (या टालने) का त्वरित उपाय।

दक्षिण भारतीय परंपरा जिसमें दिन और रात को आठ-आठ गौरी अवधियों में बाँटा जाता है — दैनिक कार्यों के लिए शुभ समय चुनने में सहायक।

दिन के सात सबसे महत्त्वपूर्ण मुहूर्तों का संक्षिप्त संग्रह — तीन शुभ (ब्रह्म, अभिजित, अमृत) और चार अशुभ (राहु काल, यमगण्ड, गुलिक, वर्ज्यम्)। कुछ दिनों पर एक अवधि की गणना संभव न होने पर कम भी दिख सकते हैं।

दिन और रात प्रत्येक बारह होरा (ग्रह-घंटों) में बँटते हैं, हर एक का स्वामी ग्रह होता है। स्वामी ग्रह उस घंटे का स्वभाव तय करता है — कार्य के अनुकूल स्वामी वाला घंटा चुनें।

कृष्ण द्वादशी · सोम

00061218अमृत · 05:47 – 07:27काल · 07:27 – 09:06शुभ · 09:06 – 10:46रोग · 10:46 – 12:26उद्वेग · 12:26 – 14:06चल · 14:06 – 15:45लाभ · 15:45 – 17:25अमृत · 17:25 – 19:05चल · 19:05 – 20:25रोग · 20:25 – 21:45काल · 21:45 – 23:06लाभ · 23:06 – 00:26उद्वेग · 00:26 – 01:47शुभ · 01:47 – 03:07अमृत · 03:07 – 04:27चल · 04:27 – 05:48अमृत · 05:47 – 07:27विष · 07:27 – 09:06रोग · 09:06 – 10:46लाभ · 10:46 – 12:26धन · 12:26 – 14:06सुख · 14:06 – 15:45चोर · 15:45 – 17:25उद्योग · 17:25 – 19:05सुख · 19:05 – 20:25चोर · 20:25 – 21:45उद्योग · 21:45 – 23:06अमृत · 23:06 – 00:26विष · 00:26 – 01:47रोग · 01:47 – 03:07लाभ · 03:07 – 04:27धन · 04:27 – 05:48ब्रह्म मुहूर्त · 04:22 – 05:04अभिजित मुहूर्त · 11:59 – 12:52राहु काल · 07:27 – 09:06यमगण्ड काल · 10:46 – 12:26गुलिक काल · 14:06 – 15:45वर्ज्यम् · 23:18 – 00:45चंद्र · 05:47 – 06:54शनि · 06:54 – 08:00गुरु · 08:00 – 09:06मंगल · 09:06 – 10:13सूर्य · 10:13 – 11:19शुक्र · 11:19 – 12:26बुध · 12:26 – 13:32चंद्र · 13:32 – 14:39शनि · 14:39 – 15:45गुरु · 15:45 – 16:52मंगल · 16:52 – 17:58सूर्य · 17:58 – 19:05शुक्र · 19:05 – 19:58बुध · 19:58 – 20:52चंद्र · 20:52 – 21:45शनि · 21:45 – 22:39गुरु · 22:39 – 23:33मंगल · 23:33 – 00:26सूर्य · 00:26 – 01:20शुक्र · 01:20 – 02:13बुध · 02:13 – 03:07चंद्र · 03:07 – 04:00शनि · 04:00 – 04:54गुरु · 04:54 – 05:48

10 अग॰

दैनिक पंचांग

दिन का चौघड़िया

8·1 घं 40 मि
05:47
07:27
09:06
10:46
12:26
14:06
15:45
17:25

रात का चौघड़िया

8·1 घं 20 मि
19:05
20:25
21:45
23:06
00:26
01:47
03:07
04:27

दिन का गौरी

8·1 घं 40 मि
05:47
07:27
09:06
10:46
12:26
14:06
15:45
17:25

रात का गौरी

8·1 घं 20 मि
19:05
20:25
21:45
23:06
00:26
01:47
03:07
04:27
04:22–05:04
11:59–12:52
07:27–09:06
10:46–12:26
14:06–15:45
23:18–00:45

दिन के होरा

12·1 घं 6 मि
05:47
06:54
08:00
09:06
10:13
11:19
12:26
13:32
14:39
15:45
16:52
17:58

रात के होरा

12·54 मि
19:05
19:58
20:52
21:45
22:39
23:33
00:26
01:20
02:13
03:07
04:00
04:54

लाहिरी अयनांश और दृक् गणित (वास्तविक स्थिति) पद्धति से गणना।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

10 अगस्त 2026 की तिथि क्या है?
10 अगस्त 2026 को कृष्ण द्वादशी तिथि 08:01 तक है, फिर कृष्ण त्रयोदशी आरंभ होती है।
10 अगस्त 2026 का नक्षत्र क्या है?
10 अगस्त 2026 को नक्षत्र आर्द्रा और योग वज्र है।
10 अगस्त 2026 को सूर्योदय और सूर्यास्त कब है?
नई दिल्ली में सूर्योदय 05:47 पर और सूर्यास्त 19:05 पर है।
10 अगस्त 2026 को राहु काल कब है?
नई दिल्ली में राहु काल 07:27 से 09:06 तक है। इस समय नए महत्त्वपूर्ण कार्य आरंभ नहीं किए जाते।