नाग पंचमी
जिस दिन सूर्योदय के समय यह तिथि हो, उसी दिन पर्व — पूरे दिन मनाया जाता है।
नाग देवताओं की पूजा का दिन। भक्त नाग प्रतिमाओं और बाँबियों पर दूध अर्पित कर रक्षा की प्रार्थना करते हैं।
दैनिक पंचांग
शुक्रवार, शुक्ल पक्ष। इस दिन नाग पंचमी है। पंचमी तिथि अगले दिन तड़के तक है, फिर षष्ठी आरंभ होती है। चन्द्रमा हस्त नक्षत्र में अगले दिन तड़के तक है, फिर चित्रा में। नए कार्य के लिए अभिजित मुहूर्त 11:59 से 12:53 तक शुभ है; राहु काल 10:46 से 12:26 तक है, इसमें नया कार्य न करें। चन्द्रमा कन्या राशि में है और सूर्य कर्क राशि में।
जिस दिन सूर्योदय के समय यह तिथि हो, उसी दिन पर्व — पूरे दिन मनाया जाता है।
नाग देवताओं की पूजा का दिन। भक्त नाग प्रतिमाओं और बाँबियों पर दूध अर्पित कर रक्षा की प्रार्थना करते हैं।
अधिक श्रावण
पवित्र चंद्र अधिक मास — उपवास, दान और भक्ति-साधना का काल।
शुक्ल पंचमी
00:37 से अगले दिन 03:14 तक
पंचमी — शांति और सामंजस्य की तिथि। अध्ययन, संगीत और कला के लिए शुभ।
शुक्रवार
शुक्रवार (स्वामी शुक्र) — सौम्य और सुखद दिन; कला, सम्बन्ध और सौंदर्य-सम्बन्धित कार्यों के लिए शुभ।
हस्त · पाद 1
पिछले दिन 23:34 से अगले दिन 02:44 तक
लघु नक्षत्र — संक्षिप्त कार्य, छोटी यात्राएँ और संवाद के लिए उपयुक्त।
सिद्ध
पिछले दिन 12:38 से 13:45 तक
साध्य
13:45 – अगले दिन 14:51
शुभ योग — सूर्य और चन्द्रमा का संयोग अनुकूल है। अधिकांश नए आरंभ के लिए सहायक माना जाता है।
बव
00:37 से 13:55 तक
बालव
13:55 – अगले दिन 03:14
चर करण — महीने भर दोहराए जाने वाले सात करणों में से एक; सामान्य कार्यों के लिए ठीक।
यहाँ आज पंचांग के समय खंड परिभाषित नहीं हैं
चौघड़िया, गौरी एवं राहु काल — सभी स्थानीय दिन-प्रकाश को आठ बराबर भागों में विभाजित करते हैं। बहुत उच्च अक्षांश (~66° से ऊपर) पर सूर्य दिन-भर डूबे या उगे रह सकता है, अतः इस तारीख़ के लिए स्थानीय सूर्योदय/सूर्यास्त की जोड़ी उपलब्ध नहीं है। ऊपर दी गई तिथि, नक्षत्र एवं योग की गणना यथावत मान्य है।
मुख्य रूप से गुजरात, राजस्थान और उत्तर भारत में प्रचलित समय-प्रणाली: दिन की आठ और रात की आठ अवधियाँ, प्रत्येक शुभ, सामान्य या अशुभ चिह्नित। दैनिक कार्य का स्लॉट चुनने (या टालने) का त्वरित उपाय।
दक्षिण भारतीय परंपरा जिसमें दिन और रात को आठ-आठ गौरी अवधियों में बाँटा जाता है — दैनिक कार्यों के लिए शुभ समय चुनने में सहायक।
दिन के सात सबसे महत्त्वपूर्ण मुहूर्तों का संक्षिप्त संग्रह — तीन शुभ (ब्रह्म, अभिजित, अमृत) और चार अशुभ (राहु काल, यमगण्ड, गुलिक, वर्ज्यम्)। कुछ दिनों पर एक अवधि की गणना संभव न होने पर कम भी दिख सकते हैं।
दिन और रात प्रत्येक बारह होरा (ग्रह-घंटों) में बँटते हैं, हर एक का स्वामी ग्रह होता है। स्वामी ग्रह उस घंटे का स्वभाव तय करता है — कार्य के अनुकूल स्वामी वाला घंटा चुनें।
शुक्ल पंचमी · शुक्र
9 अग॰
दैनिक पंचांग
दिन का चौघड़िया
8·1 घं 40 मि| 05:4707:27 | ||
| 07:2709:06 | ||
| 09:0610:46 | ||
| 10:4612:26 | ||
| 12:2614:06 | ||
| 14:0615:46 | ||
| 15:4617:25 | ||
| 17:2519:05 |
रात का चौघड़िया
8·1 घं 20 मि| 19:0520:25 | ||
| 20:2521:46 | ||
| 21:4623:06 | ||
| 23:0600:26 | ||
| 00:2601:47 | ||
| 01:4703:07 | ||
| 03:0704:27 | ||
| 04:2705:47 |
दिन का गौरी
8·1 घं 40 मि| 05:4707:27 | ||
| 07:2709:06 | ||
| 09:0610:46 | ||
| 10:4612:26 | ||
| 12:2614:06 | ||
| 14:0615:46 | ||
| 15:4617:25 | ||
| 17:2519:05 |
रात का गौरी
8·1 घं 20 मि| 19:0520:25 | ||
| 20:2521:46 | ||
| 21:4623:06 | ||
| 23:0600:26 | ||
| 00:2601:47 | ||
| 01:4703:07 | ||
| 03:0704:27 | ||
| 04:2705:47 |
| 04:21–05:04 | ||
| 11:59–12:53 | ||
| 19:56–21:45 | ||
| 10:46–12:26 | ||
| 15:46–17:25 | ||
| 07:27–09:06 | ||
| 09:04–10:53 |
दिन के होरा
12·1 घं 7 मि| 05:4706:53 | ||
| 06:5308:00 | ||
| 08:0009:06 | ||
| 09:0610:13 | ||
| 10:1311:19 | ||
| 11:1912:26 | ||
| 12:2613:32 | ||
| 13:3214:39 | ||
| 14:3915:46 | ||
| 15:4616:52 | ||
| 16:5217:59 | ||
| 17:5919:05 |
रात के होरा
12·54 मि| 19:0519:59 | ||
| 19:5920:52 | ||
| 20:5221:46 | ||
| 21:4622:39 | ||
| 22:3923:33 | ||
| 23:3300:26 | ||
| 00:2601:20 | ||
| 01:2002:13 | ||
| 02:1303:07 | ||
| 03:0704:00 | ||
| 04:0004:54 | ||
| 04:5405:47 |
लाहिरी अयनांश और दृक् गणित (वास्तविक स्थिति) पद्धति से गणना।
KundliGPT का उपयोग कैसे होता है, यह समझने और इसे बेहतर बनाने के लिए हम कुकीज़ का उपयोग करते हैं। गोपनीयता नीति ·