मकर संक्रांति
सूर्य के मकर राशि में प्रवेश और उत्तरायण की शुरुआत का प्रतीक है। पतंगबाज़ी, तिल-गुड़ की मिठाइयाँ और फसल उत्सव के साथ मनाया जाता है।
दैनिक पंचांग
बुधवार, कृष्ण पक्ष। इस दिन मकर संक्रांति है। षटतिला एकादशी तिथि शाम तक है, फिर द्वादशी आरंभ होती है। एकादशी पर बहुत से भक्त व्रत रखते हैं। चन्द्रमा अनुराधा नक्षत्र में अगले दिन तड़के तक है, फिर ज्येष्ठा में। इस दिन अमृत सिद्धि योग बन रहा है, नए कार्य के लिए शुभ। राहु काल 12:30 से 13:49 तक है, इसमें नया कार्य न करें। चन्द्रमा वृश्चिक राशि में है और सूर्य धनु राशि में।
सूर्य के मकर राशि में प्रवेश और उत्तरायण की शुरुआत का प्रतीक है। पतंगबाज़ी, तिल-गुड़ की मिठाइयाँ और फसल उत्सव के साथ मनाया जाता है।
अधिक पौष
पवित्र चंद्र अधिक मास — उपवास, दान और भक्ति-साधना का काल।
षटतिला एकादशी
पिछले दिन 15:18 से 17:53 तक
कृष्ण द्वादशी
17:53 – अगले दिन 20:16
एकादशी — अनेक लोगों के लिए उपवास का दिन। आध्यात्मिक रूप से महत्त्वपूर्ण और आत्म-चिंतन की तिथि।
बुधवार
बुधवार (स्वामी बुध) — संवाद और बुद्धि का दिन; अध्ययन, लेखन और व्यापार के लिए शुभ।
अनुराधा · पाद 2
00:06 से अगले दिन 03:03 तक
मृदु नक्षत्र — संगीत, मैत्री और चिकित्सा जैसी कोमल गतिविधियों के लिए शुभ।
गण्ड
पिछले दिन 19:04 से 19:55 तक
वृद्धि
19:55 – अगले दिन 20:38
अशुभ योग — सूर्य और चन्द्रमा का संयोग प्रतिकूल है। परंपरा में बड़े नए काम टाले जाते हैं।
बालव
04:36 से 17:53 तक
कौलव
17:53 – अगले दिन 07:06
चर करण — महीने भर दोहराए जाने वाले सात करणों में से एक; सामान्य कार्यों के लिए ठीक।
यहाँ आज पंचांग के समय खंड परिभाषित नहीं हैं
चौघड़िया, गौरी एवं राहु काल — सभी स्थानीय दिन-प्रकाश को आठ बराबर भागों में विभाजित करते हैं। बहुत उच्च अक्षांश (~66° से ऊपर) पर सूर्य दिन-भर डूबे या उगे रह सकता है, अतः इस तारीख़ के लिए स्थानीय सूर्योदय/सूर्यास्त की जोड़ी उपलब्ध नहीं है। ऊपर दी गई तिथि, नक्षत्र एवं योग की गणना यथावत मान्य है।
मुख्य रूप से गुजरात, राजस्थान और उत्तर भारत में प्रचलित समय-प्रणाली: दिन की आठ और रात की आठ अवधियाँ, प्रत्येक शुभ, सामान्य या अशुभ चिह्नित। दैनिक कार्य का स्लॉट चुनने (या टालने) का त्वरित उपाय।
दक्षिण भारतीय परंपरा जिसमें दिन और रात को आठ-आठ गौरी अवधियों में बाँटा जाता है — दैनिक कार्यों के लिए शुभ समय चुनने में सहायक।
दिन के सात सबसे महत्त्वपूर्ण मुहूर्तों का संक्षिप्त संग्रह — तीन शुभ (ब्रह्म, अभिजित, अमृत) और चार अशुभ (राहु काल, यमगण्ड, गुलिक, वर्ज्यम्)। कुछ दिनों पर एक अवधि की गणना संभव न होने पर कम भी दिख सकते हैं।
दिन और रात प्रत्येक बारह होरा (ग्रह-घंटों) में बँटते हैं, हर एक का स्वामी ग्रह होता है। स्वामी ग्रह उस घंटे का स्वभाव तय करता है — कार्य के अनुकूल स्वामी वाला घंटा चुनें।
कृष्ण एकादशी · बुध
14 जन॰
दैनिक पंचांग
दिन का चौघड़िया
8·1 घं 19 मि| 07:1508:33 | ||
| 08:3309:52 | ||
| 09:5211:11 | ||
| 11:1112:30 | ||
| 12:3013:49 | ||
| 13:4915:07 | ||
| 15:0716:26 | ||
| 16:2617:45 |
रात का चौघड़िया
8·1 घं 41 मि| 17:4519:26 | ||
| 19:2621:07 | ||
| 21:0722:48 | ||
| 22:4800:30 | ||
| 00:3002:11 | ||
| 02:1103:52 | ||
| 03:5205:33 | ||
| 05:3307:14 |
दिन का गौरी
8·1 घं 19 मि| 07:1508:33 | ||
| 08:3309:52 | ||
| 09:5211:11 | ||
| 11:1112:30 | ||
| 12:3013:49 | ||
| 13:4915:07 | ||
| 15:0716:26 | ||
| 16:2617:45 |
रात का गौरी
8·1 घं 41 मि| 17:4519:26 | ||
| 19:2621:07 | ||
| 21:0722:48 | ||
| 22:4800:30 | ||
| 00:3002:11 | ||
| 02:1103:52 | ||
| 03:5205:33 | ||
| 05:3307:14 |
| 05:26–06:21 | ||
| 15:23–17:10 | ||
| 12:30–13:49 | ||
| 08:33–09:52 | ||
| 11:11–12:30 |
दिन के होरा
12·53 मि| 07:1508:07 | ||
| 08:0709:00 | ||
| 09:0009:52 | ||
| 09:5210:45 | ||
| 10:4511:37 | ||
| 11:3712:30 | ||
| 12:3013:22 | ||
| 13:2214:15 | ||
| 14:1515:07 | ||
| 15:0716:00 | ||
| 16:0016:52 | ||
| 16:5217:45 |
रात के होरा
12·1 घं 7 मि| 17:4518:52 | ||
| 18:5220:00 | ||
| 20:0021:07 | ||
| 21:0722:15 | ||
| 22:1523:22 | ||
| 23:2200:30 | ||
| 00:3001:37 | ||
| 01:3702:45 | ||
| 02:4503:52 | ||
| 03:5205:00 | ||
| 05:0006:07 | ||
| 06:0707:14 |
लाहिरी अयनांश और दृक् गणित (वास्तविक स्थिति) पद्धति से गणना।
KundliGPT का उपयोग कैसे होता है, यह समझने और इसे बेहतर बनाने के लिए हम कुकीज़ का उपयोग करते हैं। गोपनीयता नीति ·