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गुरुवार, 17 जुलाई 2025

दैनिक पंचांग

कृष्ण पक्ष

गुरुवार, कृष्ण पक्ष। सप्तमी तिथि रात तक है, फिर अष्टमी आरंभ होती है। सप्तमी सहज तिथि है, रोज़ के काम और यात्रा के लिए अच्छी। चन्द्रमा रेवती नक्षत्र में अगले दिन तड़के तक है, फिर अश्विनी में। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है, नए कार्य के लिए शुभ। नए कार्य के लिए अभिजित मुहूर्त 11:59 से 12:54 तक शुभ है; राहु काल 14:10 से 15:53 तक है, इसमें नया कार्य न करें। चन्द्रमा मीन राशि में है और सूर्य कर्क राशि में।

तिथि · वार · चान्द्र मास

    • कृष्ण सप्तमी

      पिछले दिन 21:02 से 19:09 तक

    • फिर

      कृष्ण अष्टमी

      19:09 – अगले दिन 17:02

    सप्तमी — सामान्यतः सहज और संतुलित तिथि। नियमित कार्यों और यात्रा के लिए शुभ।

  • गुरुवार

    गुरुवार (स्वामी गुरु/बृहस्पति) — सप्ताह का सबसे शुभ दिन; अध्ययन, संस्कार और नए आरंभ के लिए श्रेष्ठ।

  • अमान्तआषाढ़
    पूर्णिमान्तश्रावण

नक्षत्र · योग · करण

    • रेवती · पाद 1

      04:50 से अगले दिन 03:39 तक

    मृदु नक्षत्र — संगीत, मैत्री और चिकित्सा जैसी कोमल गतिविधियों के लिए शुभ।

    • अतिगण्ड

      पिछले दिन 11:57 से 09:28 तक

    • फिर

      सुकर्मा

      09:28 – अगले दिन 06:48

    अशुभ योग — सूर्य और चन्द्रमा का संयोग प्रतिकूल है। परंपरा में बड़े नए काम टाले जाते हैं।

    • विष्टि

      पिछले दिन 21:02 से 08:07 तक

    • फिर

      बव

      08:07 – 19:09

    • फिर

      बालव

      19:09 – अगले दिन 06:07

    विष्टि (भद्रा) करण — महत्त्वपूर्ण नए कार्यों के लिए परंपरा में टाला जाता है; सामान्य कार्य चलते हैं।

एक नज़र में दिन

मुख्य रूप से गुजरात, राजस्थान और उत्तर भारत में प्रचलित समय-प्रणाली: दिन की आठ और रात की आठ अवधियाँ, प्रत्येक शुभ, सामान्य या अशुभ चिह्नित। दैनिक कार्य का स्लॉट चुनने (या टालने) का त्वरित उपाय।

दक्षिण भारतीय परंपरा जिसमें दिन और रात को आठ-आठ गौरी अवधियों में बाँटा जाता है — दैनिक कार्यों के लिए शुभ समय चुनने में सहायक।

दिन के सात सबसे महत्त्वपूर्ण मुहूर्तों का संक्षिप्त संग्रह — तीन शुभ (ब्रह्म, अभिजित, अमृत) और चार अशुभ (राहु काल, यमगण्ड, गुलिक, वर्ज्यम्)। कुछ दिनों पर एक अवधि की गणना संभव न होने पर कम भी दिख सकते हैं।

दिन और रात प्रत्येक बारह होरा (ग्रह-घंटों) में बँटते हैं, हर एक का स्वामी ग्रह होता है। स्वामी ग्रह उस घंटे का स्वभाव तय करता है — कार्य के अनुकूल स्वामी वाला घंटा चुनें।

कृष्ण सप्तमी · गुरु

00061218शुभ · 05:34 – 07:17रोग · 07:17 – 09:00उद्वेग · 09:00 – 10:44चल · 10:44 – 12:27लाभ · 12:27 – 14:10अमृत · 14:10 – 15:53काल · 15:53 – 17:36शुभ · 17:36 – 19:20अमृत · 19:20 – 20:36चल · 20:36 – 21:53रोग · 21:53 – 23:10काल · 23:10 – 00:27लाभ · 00:27 – 01:44उद्वेग · 01:44 – 03:01शुभ · 03:01 – 04:18अमृत · 04:18 – 05:34धन · 05:34 – 07:17सुख · 07:17 – 09:00चोर · 09:00 – 10:44उद्योग · 10:44 – 12:27अमृत · 12:27 – 14:10विष · 14:10 – 15:53रोग · 15:53 – 17:36लाभ · 17:36 – 19:20अमृत · 19:20 – 20:36विष · 20:36 – 21:53रोग · 21:53 – 23:10लाभ · 23:10 – 00:27धन · 00:27 – 01:44सुख · 01:44 – 03:01चोर · 03:01 – 04:18उद्योग · 04:18 – 05:34ब्रह्म मुहूर्त · 04:12 – 04:53अभिजित मुहूर्त · 11:59 – 12:54अमृत काल · 01:22 – 02:53राहु काल · 14:10 – 15:53यमगण्ड काल · 05:34 – 07:17गुलिक काल · 09:00 – 10:44वर्ज्यम् · 16:14 – 17:46गुरु · 05:34 – 06:43मंगल · 06:43 – 07:51सूर्य · 07:51 – 09:00शुक्र · 09:00 – 10:09बुध · 10:09 – 11:18चंद्र · 11:18 – 12:27शनि · 12:27 – 13:36गुरु · 13:36 – 14:44मंगल · 14:44 – 15:53सूर्य · 15:53 – 17:02शुक्र · 17:02 – 18:11बुध · 18:11 – 19:20चंद्र · 19:20 – 20:11शनि · 20:11 – 21:02गुरु · 21:02 – 21:53मंगल · 21:53 – 22:45सूर्य · 22:45 – 23:36शुक्र · 23:36 – 00:27बुध · 00:27 – 01:18चंद्र · 01:18 – 02:09शनि · 02:09 – 03:01गुरु · 03:01 – 03:52मंगल · 03:52 – 04:43सूर्य · 04:43 – 05:34

17 जुल॰

दैनिक पंचांग

दिन का चौघड़िया

8·1 घं 43 मि
05:34
07:17
09:00
10:44
12:27
14:10
15:53
17:36

रात का चौघड़िया

8·1 घं 17 मि
19:20
20:36
21:53
23:10
00:27
01:44
03:01
04:18

दिन का गौरी

8·1 घं 43 मि
05:34
07:17
09:00
10:44
12:27
14:10
15:53
17:36

रात का गौरी

8·1 घं 17 मि
19:20
20:36
21:53
23:10
00:27
01:44
03:01
04:18
04:12–04:53
11:59–12:54
01:22–02:53
14:10–15:53
05:34–07:17
09:00–10:44
16:14–17:46

दिन के होरा

12·1 घं 9 मि
05:34
06:43
07:51
09:00
10:09
11:18
12:27
13:36
14:44
15:53
17:02
18:11

रात के होरा

12·51 मि
19:20
20:11
21:02
21:53
22:45
23:36
00:27
01:18
02:09
03:01
03:52
04:43

लाहिरी अयनांश और दृक् गणित (वास्तविक स्थिति) पद्धति से गणना।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

17 जुलाई 2025 की तिथि क्या है?
17 जुलाई 2025 को कृष्ण सप्तमी तिथि 19:09 तक है, फिर कृष्ण अष्टमी आरंभ होती है।
17 जुलाई 2025 का नक्षत्र क्या है?
17 जुलाई 2025 को नक्षत्र रेवती और योग अतिगण्ड है।
17 जुलाई 2025 को सूर्योदय और सूर्यास्त कब है?
नई दिल्ली में सूर्योदय 05:34 पर और सूर्यास्त 19:20 पर है।
17 जुलाई 2025 को राहु काल कब है?
नई दिल्ली में राहु काल 14:10 से 15:53 तक है। इस समय नए महत्त्वपूर्ण कार्य आरंभ नहीं किए जाते।