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शुक्रवार, 4 जून 2027

दैनिक पंचांग

कृष्ण पक्ष

शुक्रवार, कृष्ण पक्ष। इस दिन वट सावित्री है। अमावस्या तिथि अगले दिन तड़के तक है, फिर प्रतिपदा आरंभ होती है। चन्द्रमा कृत्तिका नक्षत्र में सुबह तक है, फिर रोहिणी में। नए कार्य के लिए अभिजित मुहूर्त 11:51 से 12:47 तक शुभ है; राहु काल 10:35 से 12:19 तक है, इसमें नया कार्य न करें। चन्द्रमा और सूर्य दोनों वृषभ राशि में हैं।

इस दिन के पर्व

शुक्रवार, 4 जून

वट सावित्री

वट सावित्री अमावस्या

जिस दिन सूर्योदय के समय यह तिथि हो, उसी दिन पर्व — पूरे दिन मनाया जाता है।

विवाहित स्त्रियाँ वट वृक्ष की परिक्रमा और पूजा कर पति की दीर्घायु के लिए प्रार्थना करती हैं, सावित्री द्वारा सत्यवान को यमराज से वापस लाने की कथा का स्मरण करते हुए।

तिथि · वार · चान्द्र मास

    • अमावस्या

      04:05 से अगले दिन 01:10 तक

    अमावस्या — नव चंद्र की तिथि। पितृ तर्पण, शांत पूजा और विश्राम का दिन; नए कार्य टाले जाते हैं।

  • शुक्रवार

    शुक्रवार (स्वामी शुक्र) — सौम्य और सुखद दिन; कला, सम्बन्ध और सौंदर्य-सम्बन्धित कार्यों के लिए शुभ।

  • अमान्तवैशाख
    पूर्णिमान्तज्येष्ठ

नक्षत्र · योग · करण

    • कृत्तिका

      पिछले दिन 11:02 से 09:13 तक

    • फिर

      रोहिणी

      09:13 – अगले दिन 07:02

    मिश्र नक्षत्र — मिली-जुली ऊर्जा; कार्य की प्रकृति दिन के अनुरूप चुनें।

    • सुकर्मा

      पिछले दिन 19:05 से 15:46 तक

    • फिर

      धृति

      15:46 – अगले दिन 12:10

    शुभ योग — सूर्य और चन्द्रमा का संयोग अनुकूल है। अधिकांश नए आरंभ के लिए सहायक माना जाता है।

    • चतुष्पाद

      04:05 से 14:40 तक

    • फिर

      नाग

      14:40 – अगले दिन 01:10

    स्थिर करण — मास के अंत में ही आते हैं और परिवर्तन का संकेत देते हैं। अधूरे कार्य पूर्ण करने के लिए उपयुक्त।

एक नज़र में दिन

मुख्य रूप से गुजरात, राजस्थान और उत्तर भारत में प्रचलित समय-प्रणाली: दिन की आठ और रात की आठ अवधियाँ, प्रत्येक शुभ, सामान्य या अशुभ चिह्नित। दैनिक कार्य का स्लॉट चुनने (या टालने) का त्वरित उपाय।

दक्षिण भारतीय परंपरा जिसमें दिन और रात को आठ-आठ गौरी अवधियों में बाँटा जाता है — दैनिक कार्यों के लिए शुभ समय चुनने में सहायक।

दिन के सात सबसे महत्त्वपूर्ण मुहूर्तों का संक्षिप्त संग्रह — तीन शुभ (ब्रह्म, अभिजित, अमृत) और चार अशुभ (राहु काल, यमगण्ड, गुलिक, वर्ज्यम्)। कुछ दिनों पर एक अवधि की गणना संभव न होने पर कम भी दिख सकते हैं।

दिन और रात प्रत्येक बारह होरा (ग्रह-घंटों) में बँटते हैं, हर एक का स्वामी ग्रह होता है। स्वामी ग्रह उस घंटे का स्वभाव तय करता है — कार्य के अनुकूल स्वामी वाला घंटा चुनें।

अमावस्या · शुक्र

00061218चल · 05:23 – 07:07लाभ · 07:07 – 08:51अमृत · 08:51 – 10:35काल · 10:35 – 12:19शुभ · 12:19 – 14:03रोग · 14:03 – 15:47उद्वेग · 15:47 – 17:31चल · 17:31 – 19:15रोग · 19:15 – 20:31काल · 20:31 – 21:47लाभ · 21:47 – 23:03उद्वेग · 23:03 – 00:19शुभ · 00:19 – 01:35अमृत · 01:35 – 02:51चल · 02:51 – 04:07रोग · 04:07 – 05:23सुख · 05:23 – 07:07चोर · 07:07 – 08:51उद्योग · 08:51 – 10:35विष · 10:35 – 12:19अमृत · 12:19 – 14:03रोग · 14:03 – 15:47लाभ · 15:47 – 17:31धन · 17:31 – 19:15रोग · 19:15 – 20:31लाभ · 20:31 – 21:47धन · 21:47 – 23:03सुख · 23:03 – 00:19चोर · 00:19 – 01:35उद्योग · 01:35 – 02:51विष · 02:51 – 04:07अमृत · 04:07 – 05:23ब्रह्म मुहूर्त · 04:02 – 04:42अभिजित मुहूर्त · 11:51 – 12:47अमृत काल · 07:00 – 08:29राहु काल · 10:35 – 12:19यमगण्ड काल · 15:47 – 17:31गुलिक काल · 07:07 – 08:51वर्ज्यम् · 23:46 – 01:13शुक्र · 05:23 – 06:32बुध · 06:32 – 07:42चंद्र · 07:42 – 08:51शनि · 08:51 – 10:00गुरु · 10:00 – 11:10मंगल · 11:10 – 12:19सूर्य · 12:19 – 13:28शुक्र · 13:28 – 14:38बुध · 14:38 – 15:47चंद्र · 15:47 – 16:57शनि · 16:57 – 18:06गुरु · 18:06 – 19:15मंगल · 19:15 – 20:06सूर्य · 20:06 – 20:57शुक्र · 20:57 – 21:47बुध · 21:47 – 22:38चंद्र · 22:38 – 23:28शनि · 23:28 – 00:19गुरु · 00:19 – 01:10मंगल · 01:10 – 02:00सूर्य · 02:00 – 02:51शुक्र · 02:51 – 03:41बुध · 03:41 – 04:32चंद्र · 04:32 – 05:23

4 जून

दैनिक पंचांग

दिन का चौघड़िया

8·1 घं 44 मि
05:23
07:07
08:51
10:35
12:19
14:03
15:47
17:31

रात का चौघड़िया

8·1 घं 16 मि
19:15
20:31
21:47
23:03
00:19
01:35
02:51
04:07

दिन का गौरी

8·1 घं 44 मि
05:23
07:07
08:51
10:35
12:19
14:03
15:47
17:31

रात का गौरी

8·1 घं 16 मि
19:15
20:31
21:47
23:03
00:19
01:35
02:51
04:07
04:02–04:42
11:51–12:47
07:00–08:29
10:35–12:19
15:47–17:31
07:07–08:51
23:46–01:13

दिन के होरा

12·1 घं 9 मि
05:23
06:32
07:42
08:51
10:00
11:10
12:19
13:28
14:38
15:47
16:57
18:06

रात के होरा

12·51 मि
19:15
20:06
20:57
21:47
22:38
23:28
00:19
01:10
02:00
02:51
03:41
04:32

लाहिरी अयनांश और दृक् गणित (वास्तविक स्थिति) पद्धति से गणना।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

4 जून 2027 की तिथि क्या है?
4 जून 2027 को अमावस्या तिथि 5 जून 01:10 तक है, फिर शुक्ल प्रतिपदा आरंभ होती है।
4 जून 2027 का नक्षत्र क्या है?
4 जून 2027 को नक्षत्र कृत्तिका और योग सुकर्मा है।
4 जून 2027 को सूर्योदय और सूर्यास्त कब है?
नई दिल्ली में सूर्योदय 05:23 पर और सूर्यास्त 19:15 पर है।
4 जून 2027 को राहु काल कब है?
नई दिल्ली में राहु काल 10:35 से 12:19 तक है। इस समय नए महत्त्वपूर्ण कार्य आरंभ नहीं किए जाते।