मुख्य सामग्री पर जाएँ

रविवार, 21 मार्च 2027

दैनिक पंचांग

शुक्ल पक्ष

रविवार, शुक्ल पक्ष। इस दिन होलिका दहन है। चतुर्दशी तिथि शाम तक है, फिर पूर्णिमा आरंभ होती है। चतुर्दशी तीव्र तिथि है। बड़े निर्णय सोच-समझकर लें। चन्द्रमा पूर्व फाल्गुनी नक्षत्र में रात तक है, फिर उत्तर फाल्गुनी में। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है, नए कार्य के लिए शुभ। नए कार्य के लिए अभिजित मुहूर्त 12:04 से 12:52 तक शुभ है; राहु काल 17:01 से 18:32 तक है, इसमें नया कार्य न करें। चन्द्रमा सिंह राशि में है और सूर्य मीन राशि में।

इस दिन के पर्व

रविवार, 21 मार्च

होलिका दहन

प्रदोष काल, भद्रा में18:32 – 20:54

इस वर्ष पूरी संध्या भद्रा का साया है और भद्रा आधी रात के बाद तक रहती है, जबकि तिथि अगली संध्या से पहले समाप्त हो जाती है। यहाँ पंचांगों में मतभेद है: कुछ इसी प्रदोष काल में यह कर्म करते हैं, कुछ देर रात भद्रा पुच्छ में या अगले दिन। अपनी पारिवारिक या स्थानीय परंपरा का पालन करें।

होली से एक शाम पहले का दहन — फाल्गुन पूर्णिमा के प्रदोष काल में, भद्रा बीत जाने पर अग्नि प्रज्वलित की जाती है। यह वर्ष भर के द्वेष को जलाने और भक्त प्रह्लाद की रक्षा की स्मृति है।

इस दिन के अन्य पर्व

  • छोटी होली

    उत्तर भारत

    होलिका दहन की संध्या को उत्तर भारत में छोटी होली कहा जाता है: सूर्यास्त के बाद होलिका जलती है और अगली सुबह रंग खेले जाते हैं।

तिथि · वार · चान्द्र मास

    • शुक्ल चतुर्दशी

      पिछले दिन 20:45 से 18:21 तक

    • फिर

      पूर्णिमा

      18:21 – अगले दिन 16:13

    चतुर्दशी — तीव्र और परिवर्तनकारी तिथि। बड़े निर्णय सावधानी से लेने चाहिए।

  • रविवार

    रविवार (स्वामी सूर्य) — तेज और नेतृत्व का दिन; नेतृत्व कार्य और स्वास्थ्य के लिए शुभ।

  • अमान्तफाल्गुन
    पूर्णिमान्तफाल्गुन

नक्षत्र · योग · करण

    • पूर्व फाल्गुनी

      पिछले दिन 23:44 से 22:07 तक

    • फिर

      उत्तर फाल्गुनी

      22:07 – अगले दिन 20:46

    उग्र नक्षत्र — बड़े नए आरंभ के लिए परंपरा में टाला जाता है; पूर्णता और परिवर्तन के कार्यों के लिए उपयुक्त।

    • शूल

      पिछले दिन 20:05 से 16:58 तक

    • फिर

      गण्ड

      16:58 – अगले दिन 14:04

    अशुभ योग — सूर्य और चन्द्रमा का संयोग प्रतिकूल है। परंपरा में बड़े नए काम टाले जाते हैं।

    • गर

      पिछले दिन 20:45 से 07:32 तक

    • फिर

      वणिज

      07:32 – 18:21

    • फिर

      विष्टि

      18:21 – अगले दिन 05:15

    चर करण — महीने भर दोहराए जाने वाले सात करणों में से एक; सामान्य कार्यों के लिए ठीक।

एक नज़र में दिन

मुख्य रूप से गुजरात, राजस्थान और उत्तर भारत में प्रचलित समय-प्रणाली: दिन की आठ और रात की आठ अवधियाँ, प्रत्येक शुभ, सामान्य या अशुभ चिह्नित। दैनिक कार्य का स्लॉट चुनने (या टालने) का त्वरित उपाय।

दक्षिण भारतीय परंपरा जिसमें दिन और रात को आठ-आठ गौरी अवधियों में बाँटा जाता है — दैनिक कार्यों के लिए शुभ समय चुनने में सहायक।

दिन के सात सबसे महत्त्वपूर्ण मुहूर्तों का संक्षिप्त संग्रह — तीन शुभ (ब्रह्म, अभिजित, अमृत) और चार अशुभ (राहु काल, यमगण्ड, गुलिक, वर्ज्यम्)। कुछ दिनों पर एक अवधि की गणना संभव न होने पर कम भी दिख सकते हैं।

दिन और रात प्रत्येक बारह होरा (ग्रह-घंटों) में बँटते हैं, हर एक का स्वामी ग्रह होता है। स्वामी ग्रह उस घंटे का स्वभाव तय करता है — कार्य के अनुकूल स्वामी वाला घंटा चुनें।

शुक्ल चतुर्दशी · रवि

00061218उद्वेग · 06:24 – 07:55चल · 07:55 – 09:26लाभ · 09:26 – 10:57अमृत · 10:57 – 12:28काल · 12:28 – 13:59शुभ · 13:59 – 15:30रोग · 15:30 – 17:01उद्वेग · 17:01 – 18:32शुभ · 18:32 – 20:01अमृत · 20:01 – 21:30चल · 21:30 – 22:59रोग · 22:59 – 00:28काल · 00:28 – 01:56लाभ · 01:56 – 03:25उद्वेग · 03:25 – 04:54शुभ · 04:54 – 06:23उद्योग · 06:24 – 07:55अमृत · 07:55 – 09:26रोग · 09:26 – 10:57लाभ · 10:57 – 12:28धन · 12:28 – 13:59सुख · 13:59 – 15:30चोर · 15:30 – 17:01विष · 17:01 – 18:32धन · 18:32 – 20:01सुख · 20:01 – 21:30चोर · 21:30 – 22:59विष · 22:59 – 00:28उद्योग · 00:28 – 01:56अमृत · 01:56 – 03:25रोग · 03:25 – 04:54लाभ · 04:54 – 06:23ब्रह्म मुहूर्त · 04:49 – 05:37अभिजित मुहूर्त · 12:04 – 12:52अमृत काल · 16:09 – 17:38राहु काल · 17:01 – 18:32यमगण्ड काल · 12:28 – 13:59गुलिक काल · 15:30 – 17:01वर्ज्यम् · 07:12 – 08:41सूर्य · 06:24 – 07:25शुक्र · 07:25 – 08:25बुध · 08:25 – 09:26चंद्र · 09:26 – 10:27शनि · 10:27 – 11:27गुरु · 11:27 – 12:28मंगल · 12:28 – 13:29सूर्य · 13:29 – 14:30शुक्र · 14:30 – 15:30बुध · 15:30 – 16:31चंद्र · 16:31 – 17:32शनि · 17:32 – 18:32गुरु · 18:32 – 19:31मंगल · 19:31 – 20:31सूर्य · 20:31 – 21:30शुक्र · 21:30 – 22:29बुध · 22:29 – 23:28चंद्र · 23:28 – 00:28शनि · 00:28 – 01:27गुरु · 01:27 – 02:26मंगल · 02:26 – 03:25सूर्य · 03:25 – 04:24शुक्र · 04:24 – 05:24बुध · 05:24 – 06:23

21 मार्च

दैनिक पंचांग

दिन का चौघड़िया

8·1 घं 31 मि
06:24
07:55
09:26
10:57
12:28
13:59
15:30
17:01

रात का चौघड़िया

8·1 घं 29 मि
18:32
20:01
21:30
22:59
00:28
01:56
03:25
04:54

दिन का गौरी

8·1 घं 31 मि
06:24
07:55
09:26
10:57
12:28
13:59
15:30
17:01

रात का गौरी

8·1 घं 29 मि
18:32
20:01
21:30
22:59
00:28
01:56
03:25
04:54
04:49–05:37
12:04–12:52
16:09–17:38
17:01–18:32
12:28–13:59
15:30–17:01
07:12–08:41

दिन के होरा

12·1 घं 1 मि
06:24
07:25
08:25
09:26
10:27
11:27
12:28
13:29
14:30
15:30
16:31
17:32

रात के होरा

12·59 मि
18:32
19:31
20:31
21:30
22:29
23:28
00:28
01:27
02:26
03:25
04:24
05:24

लाहिरी अयनांश और दृक् गणित (वास्तविक स्थिति) पद्धति से गणना।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

21 मार्च 2027 की तिथि क्या है?
21 मार्च 2027 को शुक्ल चतुर्दशी तिथि 18:21 तक है, फिर पूर्णिमा आरंभ होती है।
21 मार्च 2027 का नक्षत्र क्या है?
21 मार्च 2027 को नक्षत्र पूर्व फाल्गुनी और योग शूल है।
21 मार्च 2027 को सूर्योदय और सूर्यास्त कब है?
नई दिल्ली में सूर्योदय 06:24 पर और सूर्यास्त 18:32 पर है।
21 मार्च 2027 को राहु काल कब है?
नई दिल्ली में राहु काल 17:01 से 18:32 तक है। इस समय नए महत्त्वपूर्ण कार्य आरंभ नहीं किए जाते।