शनिवार, 1 नवंबर 2025
दैनिक पंचांग
शनिवार, शुक्ल पक्ष। दशमी तिथि सुबह तक है, फिर देवउठनी एकादशी आरंभ होती है। दशमी स्थिर तिथि है, अधिकतर कामों के लिए शुभ। चन्द्रमा शतभिषा नक्षत्र में शाम तक है, फिर पूर्व भाद्रपदा में। नए कार्य के लिए अभिजित मुहूर्त 11:42 से 12:26 तक शुभ है; राहु काल 09:18 से 10:41 तक है, इसमें नया कार्य न करें। चन्द्रमा कुम्भ राशि में है और सूर्य तुला राशि में।
पुरुषोत्तम मास
अधिक कार्तिक
पवित्र चंद्र अधिक मास — उपवास, दान और भक्ति-साधना का काल।
तिथि · वार · चान्द्र मास
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शुक्ल दशमी
पिछले दिन 10:04 से 09:12 तक
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फिर
देवउठनी एकादशी
09:12 – अगले दिन 07:31
दशमी — स्थिर और भरोसेमंद तिथि। अधिकांश कार्यों के लिए शुभ मानी जाती है।
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शनिवार
शनिवार (स्वामी शनि) — अनुशासित और गंभीर दिन; अधूरे कार्य पूर्ण करने के लिए उपयुक्त, नए आरंभ के लिए कम।
- अमान्तकार्तिकपूर्णिमान्तकार्तिक
नक्षत्र · योग · करण
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शतभिषा
पिछले दिन 18:51 से 18:20 तक
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फिर
पूर्व भाद्रपदा
18:20 – अगले दिन 17:03
चर नक्षत्र — यात्रा, बदलाव और स्थान-परिवर्तन के लिए शुभ।
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ध्रुव
04:31 से अगले दिन 02:09 तक
शुभ योग — सूर्य और चन्द्रमा का संयोग अनुकूल है। अधिकांश नए आरंभ के लिए सहायक माना जाता है।
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गर
पिछले दिन 21:44 से 09:12 तक
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फिर
वणिज
09:12 – 20:27
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फिर
विष्टि
20:27 – अगले दिन 07:31
चर करण — महीने भर दोहराए जाने वाले सात करणों में से एक; सामान्य कार्यों के लिए ठीक।
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एक नज़र में दिन
यहाँ आज पंचांग के समय खंड परिभाषित नहीं हैं
चौघड़िया, गौरी एवं राहु काल — सभी स्थानीय दिन-प्रकाश को आठ बराबर भागों में विभाजित करते हैं। बहुत उच्च अक्षांश (~66° से ऊपर) पर सूर्य दिन-भर डूबे या उगे रह सकता है, अतः इस तारीख़ के लिए स्थानीय सूर्योदय/सूर्यास्त की जोड़ी उपलब्ध नहीं है। ऊपर दी गई तिथि, नक्षत्र एवं योग की गणना यथावत मान्य है।
मुख्य रूप से गुजरात, राजस्थान और उत्तर भारत में प्रचलित समय-प्रणाली: दिन की आठ और रात की आठ अवधियाँ, प्रत्येक शुभ, सामान्य या अशुभ चिह्नित। दैनिक कार्य का स्लॉट चुनने (या टालने) का त्वरित उपाय।
दक्षिण भारतीय परंपरा जिसमें दिन और रात को आठ-आठ गौरी अवधियों में बाँटा जाता है — दैनिक कार्यों के लिए शुभ समय चुनने में सहायक।
दिन के सात सबसे महत्त्वपूर्ण मुहूर्तों का संक्षिप्त संग्रह — तीन शुभ (ब्रह्म, अभिजित, अमृत) और चार अशुभ (राहु काल, यमगण्ड, गुलिक, वर्ज्यम्)। कुछ दिनों पर एक अवधि की गणना संभव न होने पर कम भी दिख सकते हैं।
दिन और रात प्रत्येक बारह होरा (ग्रह-घंटों) में बँटते हैं, हर एक का स्वामी ग्रह होता है। स्वामी ग्रह उस घंटे का स्वभाव तय करता है — कार्य के अनुकूल स्वामी वाला घंटा चुनें।
शुक्ल दशमी · शनि
1 नव॰
दैनिक पंचांग
दिन का चौघड़िया
8·1 घं 23 मि| 06:3307:56 | ||
| 07:5609:18 | ||
| 09:1810:41 | ||
| 10:4112:04 | ||
| 12:0413:27 | ||
| 13:2714:50 | ||
| 14:5016:13 | ||
| 16:1317:36 |
रात का चौघड़िया
8·1 घं 37 मि| 17:3619:13 | ||
| 19:1320:50 | ||
| 20:5022:27 | ||
| 22:2700:04 | ||
| 00:0401:42 | ||
| 01:4203:19 | ||
| 03:1904:56 | ||
| 04:5606:33 |
दिन का गौरी
8·1 घं 23 मि| 06:3307:56 | ||
| 07:5609:18 | ||
| 09:1810:41 | ||
| 10:4112:04 | ||
| 12:0413:27 | ||
| 13:2714:50 | ||
| 14:5016:13 | ||
| 16:1317:36 |
रात का गौरी
8·1 घं 37 मि| 17:3619:13 | ||
| 19:1320:50 | ||
| 20:5022:27 | ||
| 22:2700:04 | ||
| 00:0401:42 | ||
| 01:4203:19 | ||
| 03:1904:56 | ||
| 04:5606:33 |
| 04:49–05:41 | ||
| 11:42–12:26 | ||
| 11:17–12:51 | ||
| 09:18–10:41 | ||
| 13:27–14:50 | ||
| 06:33–07:56 | ||
| 00:24–01:55 |
दिन के होरा
12·55 मि| 06:3307:28 | ||
| 07:2808:23 | ||
| 08:2309:18 | ||
| 09:1810:14 | ||
| 10:1411:09 | ||
| 11:0912:04 | ||
| 12:0412:59 | ||
| 12:5913:55 | ||
| 13:5514:50 | ||
| 14:5015:45 | ||
| 15:4516:40 | ||
| 16:4017:36 |
रात के होरा
12·1 घं 5 मि| 17:3618:40 | ||
| 18:4019:45 | ||
| 19:4520:50 | ||
| 20:5021:55 | ||
| 21:5523:00 | ||
| 23:0000:04 | ||
| 00:0401:09 | ||
| 01:0902:14 | ||
| 02:1403:19 | ||
| 03:1904:24 | ||
| 04:2405:29 | ||
| 05:2906:33 |
लाहिरी अयनांश और दृक् गणित (वास्तविक स्थिति) पद्धति से गणना।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- 1 नवंबर 2025 की तिथि क्या है?
- 1 नवंबर 2025 को शुक्ल दशमी तिथि 09:12 तक है, फिर देवउठनी एकादशी आरंभ होती है।
- 1 नवंबर 2025 का नक्षत्र क्या है?
- 1 नवंबर 2025 को नक्षत्र शतभिषा और योग ध्रुव है।
- 1 नवंबर 2025 को सूर्योदय और सूर्यास्त कब है?
- नई दिल्ली में सूर्योदय 06:33 पर और सूर्यास्त 17:36 पर है।
- 1 नवंबर 2025 को राहु काल कब है?
- नई दिल्ली में राहु काल 09:18 से 10:41 तक है। इस समय नए महत्त्वपूर्ण कार्य आरंभ नहीं किए जाते।



