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शुक्रवार, 1 नवंबर 2024

दैनिक पंचांग

  • दिवाली
  • लक्ष्मी पूजन
  • चोपड़ा पूजन
  • शारदा पूजन
कृष्ण पक्ष

शुक्रवार, कृष्ण पक्ष। इस दिन दिवाली है। अमावस्या तिथि शाम तक है, फिर प्रतिपदा आरंभ होती है। चन्द्रमा स्वाति नक्षत्र में अगले दिन तड़के तक है, फिर विशाखा में। नए कार्य के लिए अभिजित मुहूर्त 11:42 से 12:26 तक शुभ है; राहु काल 10:41 से 12:04 तक है, इसमें नया कार्य न करें। चन्द्रमा और सूर्य दोनों तुला राशि में हैं।

इस दिन के पर्व

शुक्रवार, 1 नवंबर

दिवाली

दीपावली

प्रदोष काल17:35 – 18:17

लक्ष्मी पूजन सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में, अमावस्या रहते किया जाता है; इसमें स्थिर लग्न श्रेष्ठ है।

दीपों का पर्व — अमावस्या की संध्या प्रदोष काल में लक्ष्मी पूजन होता है, घर दीयों से जगमगाते हैं और मिठाइयाँ बाँटी जाती हैं। इसके बाद कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को गोवर्धन पूजा और गुजरात में नववर्ष (बेस्तु वरस) मनाया जाता है।

इस दिन के अन्य पर्व

  • लक्ष्मी पूजन

    अन्य नाम: लक्ष्मी गणेश पूजन

    दीपावली का मुख्य अनुष्ठान: दीप, मिठाई और नए बही-खातों के साथ लक्ष्मी-गणेश का पूजन होता है और घर को प्रकाशित रखा जाता है ताकि समृद्धि प्रवेश करे।

  • चोपड़ा पूजन

    गुजरात

    दीपावली की संध्या गुजरात के व्यापारी पुराने बही-खाते बंद कर लक्ष्मी और सरस्वती के सामने नए खाते खोलते हैं, जिनके पहले पृष्ठ पर स्वस्तिक और 'शुभ लाभ' लिखा जाता है।

  • शारदा पूजन

    दीपावली की रात लक्ष्मी के साथ शारदा रूप में सरस्वती की पूजा होती है, ताकि नववर्ष में विद्या और धन साथ-साथ बढ़ें।

तिथि · वार · चान्द्र मास

    • अमावस्या

      पिछले दिन 15:53 से 18:17 तक

    • फिर

      शुक्ल प्रतिपदा

      18:17 – अगले दिन 20:22

    अमावस्या — नव चंद्र की तिथि। पितृ तर्पण, शांत पूजा और विश्राम का दिन; नए कार्य टाले जाते हैं।

  • शुक्रवार

    शुक्रवार (स्वामी शुक्र) — सौम्य और सुखद दिन; कला, सम्बन्ध और सौंदर्य-सम्बन्धित कार्यों के लिए शुभ।

  • अमान्तआश्विन
    पूर्णिमान्तकार्तिक

नक्षत्र · योग · करण

    • स्वाति · पाद 1

      00:44 से अगले दिन 03:30 तक

    चर नक्षत्र — यात्रा, बदलाव और स्थान-परिवर्तन के लिए शुभ।

    • प्रीति

      पिछले दिन 09:50 से 10:40 तक

    • फिर

      आयुष्मान्

      10:40 – अगले दिन 11:17

    शुभ योग — सूर्य और चन्द्रमा का संयोग अनुकूल है। अधिकांश नए आरंभ के लिए सहायक माना जाता है।

    • नाग

      05:07 से 18:17 तक

    • फिर

      किंस्तुघ्न

      18:17 – अगले दिन 07:22

    स्थिर करण — मास के अंत में ही आते हैं और परिवर्तन का संकेत देते हैं। अधूरे कार्य पूर्ण करने के लिए उपयुक्त।

एक नज़र में दिन

मुख्य रूप से गुजरात, राजस्थान और उत्तर भारत में प्रचलित समय-प्रणाली: दिन की आठ और रात की आठ अवधियाँ, प्रत्येक शुभ, सामान्य या अशुभ चिह्नित। दैनिक कार्य का स्लॉट चुनने (या टालने) का त्वरित उपाय।

दक्षिण भारतीय परंपरा जिसमें दिन और रात को आठ-आठ गौरी अवधियों में बाँटा जाता है — दैनिक कार्यों के लिए शुभ समय चुनने में सहायक।

दिन के सात सबसे महत्त्वपूर्ण मुहूर्तों का संक्षिप्त संग्रह — तीन शुभ (ब्रह्म, अभिजित, अमृत) और चार अशुभ (राहु काल, यमगण्ड, गुलिक, वर्ज्यम्)। कुछ दिनों पर एक अवधि की गणना संभव न होने पर कम भी दिख सकते हैं।

दिन और रात प्रत्येक बारह होरा (ग्रह-घंटों) में बँटते हैं, हर एक का स्वामी ग्रह होता है। स्वामी ग्रह उस घंटे का स्वभाव तय करता है — कार्य के अनुकूल स्वामी वाला घंटा चुनें।

अमावस्या · शुक्र

00061218चल · 06:33 – 07:56लाभ · 07:56 – 09:18अमृत · 09:18 – 10:41काल · 10:41 – 12:04शुभ · 12:04 – 13:27रोग · 13:27 – 14:50उद्वेग · 14:50 – 16:13चल · 16:13 – 17:35रोग · 17:35 – 19:13काल · 19:13 – 20:50लाभ · 20:50 – 22:27उद्वेग · 22:27 – 00:04शुभ · 00:04 – 01:42अमृत · 01:42 – 03:19चल · 03:19 – 04:56रोग · 04:56 – 06:34सुख · 06:33 – 07:56चोर · 07:56 – 09:18उद्योग · 09:18 – 10:41विष · 10:41 – 12:04अमृत · 12:04 – 13:27रोग · 13:27 – 14:50लाभ · 14:50 – 16:13धन · 16:13 – 17:35रोग · 17:35 – 19:13लाभ · 19:13 – 20:50धन · 20:50 – 22:27सुख · 22:27 – 00:04चोर · 00:04 – 01:42उद्योग · 01:42 – 03:19विष · 03:19 – 04:56अमृत · 04:56 – 06:34ब्रह्म मुहूर्त · 04:49 – 05:41अभिजित मुहूर्त · 11:42 – 12:26अमृत काल · 17:41 – 19:29राहु काल · 10:41 – 12:04यमगण्ड काल · 14:50 – 16:13गुलिक काल · 07:56 – 09:18वर्ज्यम् · 06:59 – 08:46शुक्र · 06:33 – 07:28बुध · 07:28 – 08:23चंद्र · 08:23 – 09:18शनि · 09:18 – 10:14गुरु · 10:14 – 11:09मंगल · 11:09 – 12:04सूर्य · 12:04 – 12:59शुक्र · 12:59 – 13:54बुध · 13:54 – 14:50चंद्र · 14:50 – 15:45शनि · 15:45 – 16:40गुरु · 16:40 – 17:35मंगल · 17:35 – 18:40सूर्य · 18:40 – 19:45शुक्र · 19:45 – 20:50बुध · 20:50 – 21:55चंद्र · 21:55 – 23:00शनि · 23:00 – 00:04गुरु · 00:04 – 01:09मंगल · 01:09 – 02:14सूर्य · 02:14 – 03:19शुक्र · 03:19 – 04:24बुध · 04:24 – 05:29चंद्र · 05:29 – 06:34

1 नव॰

दैनिक पंचांग

दिन का चौघड़िया

8·1 घं 23 मि
06:33
07:56
09:18
10:41
12:04
13:27
14:50
16:13

रात का चौघड़िया

8·1 घं 37 मि
17:35
19:13
20:50
22:27
00:04
01:42
03:19
04:56

दिन का गौरी

8·1 घं 23 मि
06:33
07:56
09:18
10:41
12:04
13:27
14:50
16:13

रात का गौरी

8·1 घं 37 मि
17:35
19:13
20:50
22:27
00:04
01:42
03:19
04:56
04:49–05:41
11:42–12:26
17:41–19:29
10:41–12:04
14:50–16:13
07:56–09:18
06:59–08:46

दिन के होरा

12·55 मि
06:33
07:28
08:23
09:18
10:14
11:09
12:04
12:59
13:54
14:50
15:45
16:40

रात के होरा

12·1 घं 5 मि
17:35
18:40
19:45
20:50
21:55
23:00
00:04
01:09
02:14
03:19
04:24
05:29

लाहिरी अयनांश और दृक् गणित (वास्तविक स्थिति) पद्धति से गणना।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1 नवंबर 2024 की तिथि क्या है?
1 नवंबर 2024 को अमावस्या तिथि 18:17 तक है, फिर शुक्ल प्रतिपदा आरंभ होती है।
1 नवंबर 2024 का नक्षत्र क्या है?
1 नवंबर 2024 को नक्षत्र स्वाति और योग प्रीति है।
1 नवंबर 2024 को सूर्योदय और सूर्यास्त कब है?
नई दिल्ली में सूर्योदय 06:33 पर और सूर्यास्त 17:35 पर है।
1 नवंबर 2024 को राहु काल कब है?
नई दिल्ली में राहु काल 10:41 से 12:04 तक है। इस समय नए महत्त्वपूर्ण कार्य आरंभ नहीं किए जाते।