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रविवार, 19 अक्टूबर 2025

दैनिक पंचांग

कृष्ण पक्ष

रविवार, कृष्ण पक्ष। इस दिन काली चौदस है। इस दिन मासिक शिवरात्रि का व्रत है। त्रयोदशी तिथि दोपहर तक है, फिर चतुर्दशी आरंभ होती है। त्रयोदशी उत्साह की तिथि है, उत्सव के लिए अच्छी। चन्द्रमा उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र में शाम तक है, फिर हस्त में। इस दिन अमृत सिद्धि योग बन रहा है, नए कार्य के लिए शुभ। नए कार्य के लिए अभिजित मुहूर्त 11:43 से 12:28 तक शुभ है; राहु काल 16:22 से 17:47 तक है, इसमें नया कार्य न करें। चन्द्रमा कन्या राशि में है और सूर्य तुला राशि में।

इस दिन के पर्व

रविवार, 19 अक्टूबर

काली चौदस

काली चतुर्दशी

निशीथ काल23:40 – 00:31, 20 अक्टूबर

निशीथ काल — मध्यरात्रि — में चतुर्दशी रहते मनाया जाता है: हनुमान पूजन और अशुभ शक्तियों का निवारण।

गुजरातराजस्थानमहाराष्ट्रअन्य नाम: भूत चतुर्दशी

गुजरात और राजस्थान में दीपावली से पहले की रात — कृष्ण चतुर्दशी के निशीथ काल में माँ काली की पूजा कर भय और दुर्भाग्य दूर किए जाते हैं; उसी रात हनुमान जी को तेल, सिंदूर और वड़ा अर्पित किया जाता है।

इस दिन के अन्य पर्व

  • हनुमान पूजा

    गुजरात

    काली चौदस की रात गुजरात में हनुमान जी को तेल, सिंदूर, वड़ा और मिठाई अर्पित कर दीपावली से पहले भय और बुराई से रक्षा व बल की कामना की जाती है।

मासिक शिवरात्रि

व्रत

निशीथ काल23:40 – 00:31, 20 अक्टूबर

पूजा निशीथ काल — मध्यरात्रि — में, चतुर्दशी रहते की जाती है।

हर कृष्ण चतुर्दशी को, जब तिथि मध्यरात्रि में हो, मनाई जाने वाली मासिक शिवरात्रि। भक्त दिन भर उपवास रखते हैं और निशीथ काल में शिवलिंग पर जल और बेलपत्र अर्पित करते हैं; माघ (उत्तर भारत में फाल्गुन) की शिवरात्रि ही महाशिवरात्रि है।

तिथि · वार · चान्द्र मास

    • कृष्ण त्रयोदशी

      पिछले दिन 12:19 से 13:52 तक

    • फिर

      कृष्ण चतुर्दशी

      13:52 – अगले दिन 15:45

    त्रयोदशी — उत्साह की तिथि। उत्सव और सक्रिय कार्यों के लिए शुभ।

  • रविवार

    रविवार (स्वामी सूर्य) — तेज और नेतृत्व का दिन; नेतृत्व कार्य और स्वास्थ्य के लिए शुभ।

  • अमान्तआश्विन
    पूर्णिमान्तकार्तिक

नक्षत्र · योग · करण

    • उत्तर फाल्गुनी

      पिछले दिन 15:41 से 17:49 तक

    • फिर

      हस्त

      17:49 – अगले दिन 20:16

    स्थिर नक्षत्र — दीर्घकालिक संकल्प, नींव और स्थायी क्रय के लिए श्रेष्ठ।

    • ऐन्द्र

      01:48 से अगले दिन 02:04 तक

    शुभ योग — सूर्य और चन्द्रमा का संयोग अनुकूल है। अधिकांश नए आरंभ के लिए सहायक माना जाता है।

    • वणिज

      01:02 से 13:52 तक

    • फिर

      विष्टि

      13:52 – अगले दिन 02:46

    चर करण — महीने भर दोहराए जाने वाले सात करणों में से एक; सामान्य कार्यों के लिए ठीक।

एक नज़र में दिन

मुख्य रूप से गुजरात, राजस्थान और उत्तर भारत में प्रचलित समय-प्रणाली: दिन की आठ और रात की आठ अवधियाँ, प्रत्येक शुभ, सामान्य या अशुभ चिह्नित। दैनिक कार्य का स्लॉट चुनने (या टालने) का त्वरित उपाय।

दक्षिण भारतीय परंपरा जिसमें दिन और रात को आठ-आठ गौरी अवधियों में बाँटा जाता है — दैनिक कार्यों के लिए शुभ समय चुनने में सहायक।

दिन के सात सबसे महत्त्वपूर्ण मुहूर्तों का संक्षिप्त संग्रह — तीन शुभ (ब्रह्म, अभिजित, अमृत) और चार अशुभ (राहु काल, यमगण्ड, गुलिक, वर्ज्यम्)। कुछ दिनों पर एक अवधि की गणना संभव न होने पर कम भी दिख सकते हैं।

दिन और रात प्रत्येक बारह होरा (ग्रह-घंटों) में बँटते हैं, हर एक का स्वामी ग्रह होता है। स्वामी ग्रह उस घंटे का स्वभाव तय करता है — कार्य के अनुकूल स्वामी वाला घंटा चुनें।

कृष्ण त्रयोदशी · रवि

00061218उद्वेग · 06:24 – 07:49चल · 07:49 – 09:15लाभ · 09:15 – 10:40अमृत · 10:40 – 12:05काल · 12:05 – 13:31शुभ · 13:31 – 14:56रोग · 14:56 – 16:22उद्वेग · 16:22 – 17:47शुभ · 17:47 – 19:22अमृत · 19:22 – 20:56चल · 20:56 – 22:31रोग · 22:31 – 00:06काल · 00:06 – 01:40लाभ · 01:40 – 03:15उद्वेग · 03:15 – 04:50शुभ · 04:50 – 06:25उद्योग · 06:24 – 07:49अमृत · 07:49 – 09:15रोग · 09:15 – 10:40लाभ · 10:40 – 12:05धन · 12:05 – 13:31सुख · 13:31 – 14:56चोर · 14:56 – 16:22विष · 16:22 – 17:47धन · 17:47 – 19:22सुख · 19:22 – 20:56चोर · 20:56 – 22:31विष · 22:31 – 00:06उद्योग · 00:06 – 01:40अमृत · 01:40 – 03:15रोग · 03:15 – 04:50लाभ · 04:50 – 06:25ब्रह्म मुहूर्त · 04:43 – 05:34अभिजित मुहूर्त · 11:43 – 12:28अमृत काल · 09:59 – 11:43राहु काल · 16:22 – 17:47यमगण्ड काल · 12:05 – 13:31गुलिक काल · 14:56 – 16:22वर्ज्यम् · 03:05 – 04:51सूर्य · 06:24 – 07:21शुक्र · 07:21 – 08:18बुध · 08:18 – 09:15चंद्र · 09:15 – 10:12शनि · 10:12 – 11:09गुरु · 11:09 – 12:05मंगल · 12:05 – 13:02सूर्य · 13:02 – 13:59शुक्र · 13:59 – 14:56बुध · 14:56 – 15:53चंद्र · 15:53 – 16:50शनि · 16:50 – 17:47गुरु · 17:47 – 18:50मंगल · 18:50 – 19:53सूर्य · 19:53 – 20:56शुक्र · 20:56 – 21:59बुध · 21:59 – 23:03चंद्र · 23:03 – 00:06शनि · 00:06 – 01:09गुरु · 01:09 – 02:12मंगल · 02:12 – 03:15सूर्य · 03:15 – 04:18शुक्र · 04:18 – 05:21बुध · 05:21 – 06:25

19 अक्टू॰

दैनिक पंचांग

दिन का चौघड़िया

8·1 घं 25 मि
06:24
07:49
09:15
10:40
12:05
13:31
14:56
16:22

रात का चौघड़िया

8·1 घं 35 मि
17:47
19:22
20:56
22:31
00:06
01:40
03:15
04:50

दिन का गौरी

8·1 घं 25 मि
06:24
07:49
09:15
10:40
12:05
13:31
14:56
16:22

रात का गौरी

8·1 घं 35 मि
17:47
19:22
20:56
22:31
00:06
01:40
03:15
04:50
04:43–05:34
11:43–12:28
09:59–11:43
16:22–17:47
12:05–13:31
14:56–16:22
03:05–04:51

दिन के होरा

12·57 मि
06:24
07:21
08:18
09:15
10:12
11:09
12:05
13:02
13:59
14:56
15:53
16:50

रात के होरा

12·1 घं 3 मि
17:47
18:50
19:53
20:56
21:59
23:03
00:06
01:09
02:12
03:15
04:18
05:21

लाहिरी अयनांश और दृक् गणित (वास्तविक स्थिति) पद्धति से गणना।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

19 अक्टूबर 2025 की तिथि क्या है?
19 अक्टूबर 2025 को कृष्ण त्रयोदशी तिथि 13:52 तक है, फिर कृष्ण चतुर्दशी आरंभ होती है।
19 अक्टूबर 2025 का नक्षत्र क्या है?
19 अक्टूबर 2025 को नक्षत्र उत्तर फाल्गुनी और योग ऐन्द्र है।
19 अक्टूबर 2025 को सूर्योदय और सूर्यास्त कब है?
नई दिल्ली में सूर्योदय 06:24 पर और सूर्यास्त 17:47 पर है।
19 अक्टूबर 2025 को राहु काल कब है?
नई दिल्ली में राहु काल 16:22 से 17:47 तक है। इस समय नए महत्त्वपूर्ण कार्य आरंभ नहीं किए जाते।