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सोमवार, 20 अक्टूबर 2025

दैनिक पंचांग

कृष्ण पक्ष

सोमवार, कृष्ण पक्ष। इस दिन दिवाली और नरक चतुर्दशी हैं। चतुर्दशी तिथि दोपहर तक है, फिर अमावस्या आरंभ होती है। चन्द्रमा हस्त नक्षत्र में रात तक है, फिर चित्रा में। नए कार्य के लिए अभिजित मुहूर्त 11:43 से 12:28 तक शुभ है; राहु काल 07:50 से 09:15 तक है, इसमें नया कार्य न करें। चन्द्रमा कन्या राशि में है और सूर्य तुला राशि में।

इस दिन के पर्व

सोमवार, 20 अक्टूबर

दिवाली

दीपावली

प्रदोष काल17:46 – 20:18

लक्ष्मी पूजन सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में, अमावस्या रहते किया जाता है; इसमें स्थिर लग्न श्रेष्ठ है।

दीपों का पर्व — अमावस्या की संध्या प्रदोष काल में लक्ष्मी पूजन होता है, घर दीयों से जगमगाते हैं और मिठाइयाँ बाँटी जाती हैं। इसके बाद कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को गोवर्धन पूजा और गुजरात में नववर्ष (बेस्तु वरस) मनाया जाता है।

इस दिन के अन्य पर्व

  • लक्ष्मी पूजन

    अन्य नाम: लक्ष्मी गणेश पूजन

    दीपावली का मुख्य अनुष्ठान: दीप, मिठाई और नए बही-खातों के साथ लक्ष्मी-गणेश का पूजन होता है और घर को प्रकाशित रखा जाता है ताकि समृद्धि प्रवेश करे।

  • चोपड़ा पूजन

    गुजरात

    दीपावली की संध्या गुजरात के व्यापारी पुराने बही-खाते बंद कर लक्ष्मी और सरस्वती के सामने नए खाते खोलते हैं, जिनके पहले पृष्ठ पर स्वस्तिक और 'शुभ लाभ' लिखा जाता है।

  • शारदा पूजन

    दीपावली की रात लक्ष्मी के साथ शारदा रूप में सरस्वती की पूजा होती है, ताकि नववर्ष में विद्या और धन साथ-साथ बढ़ें।

  • काली पूजा

    निशीथ काल23:40 – 00:31, 21 अक्टूबर

    बंगालअन्य नाम: श्यामा पूजा

    बंगाल में दीपावली की अमावस्या काली पूजा के रूप में मनाई जाती है: निशीथ काल में घरों और पंडालों में दीप, जवा पुष्प और मिठाई के साथ देवी की पूजा होती है।

नरक चतुर्दशी

अरुणोदय05:12 – 06:25

अभ्यंग स्नान अरुणोदय काल में चंद्रोदय के बाद और सूर्योदय से पहले, चतुर्दशी रहते किया जाता है।

अन्य नाम: छोटी दिवाली · रूप चौदस

प्रायः दीपावली से एक दिन पहले (कुछ वर्षों में उसी दिन)। सूर्योदय से पूर्व अभ्यंग स्नान (तेल स्नान) नरकासुर पर श्रीकृष्ण की विजय का प्रतीक है। उत्तर भारत में इसे छोटी दिवाली और राजस्थान में रूप चौदस कहते हैं।

तिथि · वार · चान्द्र मास

    • कृष्ण चतुर्दशी

      पिछले दिन 13:52 से 15:45 तक

    • फिर

      अमावस्या

      15:45 – अगले दिन 17:55

    चतुर्दशी — तीव्र और परिवर्तनकारी तिथि। बड़े निर्णय सावधानी से लेने चाहिए।

  • सोमवार

    सोमवार (स्वामी चन्द्रमा) — शांत और भावपूर्ण दिन; पारिवारिक कार्य, जल-सम्बन्धित कार्य और अध्ययन के लिए उपयुक्त।

  • अमान्तआश्विन
    पूर्णिमान्तकार्तिक

नक्षत्र · योग · करण

    • हस्त

      पिछले दिन 17:49 से 20:16 तक

    • फिर

      चित्रा

      20:16 – अगले दिन 22:58

    लघु नक्षत्र — संक्षिप्त कार्य, छोटी यात्राएँ और संवाद के लिए उपयुक्त।

    • वैधृति

      02:04 से अगले दिन 02:34 तक

    अशुभ योग — सूर्य और चन्द्रमा का संयोग प्रतिकूल है। परंपरा में बड़े नए काम टाले जाते हैं।

    • शकुनि

      02:46 से 15:45 तक

    • फिर

      चतुष्पाद

      15:45 – अगले दिन 04:48

    स्थिर करण — मास के अंत में ही आते हैं और परिवर्तन का संकेत देते हैं। अधूरे कार्य पूर्ण करने के लिए उपयुक्त।

एक नज़र में दिन

मुख्य रूप से गुजरात, राजस्थान और उत्तर भारत में प्रचलित समय-प्रणाली: दिन की आठ और रात की आठ अवधियाँ, प्रत्येक शुभ, सामान्य या अशुभ चिह्नित। दैनिक कार्य का स्लॉट चुनने (या टालने) का त्वरित उपाय।

दक्षिण भारतीय परंपरा जिसमें दिन और रात को आठ-आठ गौरी अवधियों में बाँटा जाता है — दैनिक कार्यों के लिए शुभ समय चुनने में सहायक।

दिन के सात सबसे महत्त्वपूर्ण मुहूर्तों का संक्षिप्त संग्रह — तीन शुभ (ब्रह्म, अभिजित, अमृत) और चार अशुभ (राहु काल, यमगण्ड, गुलिक, वर्ज्यम्)। कुछ दिनों पर एक अवधि की गणना संभव न होने पर कम भी दिख सकते हैं।

दिन और रात प्रत्येक बारह होरा (ग्रह-घंटों) में बँटते हैं, हर एक का स्वामी ग्रह होता है। स्वामी ग्रह उस घंटे का स्वभाव तय करता है — कार्य के अनुकूल स्वामी वाला घंटा चुनें।

कृष्ण चतुर्दशी · सोम

00061218अमृत · 06:25 – 07:50काल · 07:50 – 09:15शुभ · 09:15 – 10:40रोग · 10:40 – 12:05उद्वेग · 12:05 – 13:30चल · 13:30 – 14:56लाभ · 14:56 – 16:21अमृत · 16:21 – 17:46चल · 17:46 – 19:21रोग · 19:21 – 20:56काल · 20:56 – 22:31लाभ · 22:31 – 00:06उद्वेग · 00:06 – 01:40शुभ · 01:40 – 03:15अमृत · 03:15 – 04:50चल · 04:50 – 06:25अमृत · 06:25 – 07:50विष · 07:50 – 09:15रोग · 09:15 – 10:40लाभ · 10:40 – 12:05धन · 12:05 – 13:30सुख · 13:30 – 14:56चोर · 14:56 – 16:21उद्योग · 16:21 – 17:46सुख · 17:46 – 19:21चोर · 19:21 – 20:56उद्योग · 20:56 – 22:31अमृत · 22:31 – 00:06विष · 00:06 – 01:40रोग · 01:40 – 03:15लाभ · 03:15 – 04:50धन · 04:50 – 06:25ब्रह्म मुहूर्त · 04:44 – 05:34अभिजित मुहूर्त · 11:43 – 12:28अमृत काल · 13:40 – 15:25राहु काल · 07:50 – 09:15यमगण्ड काल · 10:40 – 12:05गुलिक काल · 13:30 – 14:56वर्ज्यम् · 05:10 – 06:57चंद्र · 06:25 – 07:21शनि · 07:21 – 08:18गुरु · 08:18 – 09:15मंगल · 09:15 – 10:12सूर्य · 10:12 – 11:08शुक्र · 11:08 – 12:05बुध · 12:05 – 13:02चंद्र · 13:02 – 13:59शनि · 13:59 – 14:56गुरु · 14:56 – 15:52मंगल · 15:52 – 16:49सूर्य · 16:49 – 17:46शुक्र · 17:46 – 18:49बुध · 18:49 – 19:53चंद्र · 19:53 – 20:56शनि · 20:56 – 21:59गुरु · 21:59 – 23:02मंगल · 23:02 – 00:06सूर्य · 00:06 – 01:09शुक्र · 01:09 – 02:12बुध · 02:12 – 03:15चंद्र · 03:15 – 04:19शनि · 04:19 – 05:22गुरु · 05:22 – 06:25

20 अक्टू॰

दैनिक पंचांग

दिन का चौघड़िया

8·1 घं 25 मि
06:25
07:50
09:15
10:40
12:05
13:30
14:56
16:21

रात का चौघड़िया

8·1 घं 35 मि
17:46
19:21
20:56
22:31
00:06
01:40
03:15
04:50

दिन का गौरी

8·1 घं 25 मि
06:25
07:50
09:15
10:40
12:05
13:30
14:56
16:21

रात का गौरी

8·1 घं 35 मि
17:46
19:21
20:56
22:31
00:06
01:40
03:15
04:50
04:44–05:34
11:43–12:28
13:40–15:25
07:50–09:15
10:40–12:05
13:30–14:56
05:10–06:57

दिन के होरा

12·57 मि
06:25
07:21
08:18
09:15
10:12
11:08
12:05
13:02
13:59
14:56
15:52
16:49

रात के होरा

12·1 घं 3 मि
17:46
18:49
19:53
20:56
21:59
23:02
00:06
01:09
02:12
03:15
04:19
05:22

लाहिरी अयनांश और दृक् गणित (वास्तविक स्थिति) पद्धति से गणना।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

20 अक्टूबर 2025 की तिथि क्या है?
20 अक्टूबर 2025 को कृष्ण चतुर्दशी तिथि 15:45 तक है, फिर अमावस्या आरंभ होती है।
20 अक्टूबर 2025 का नक्षत्र क्या है?
20 अक्टूबर 2025 को नक्षत्र हस्त और योग वैधृति है।
20 अक्टूबर 2025 को सूर्योदय और सूर्यास्त कब है?
नई दिल्ली में सूर्योदय 06:25 पर और सूर्यास्त 17:46 पर है।
20 अक्टूबर 2025 को राहु काल कब है?
नई दिल्ली में राहु काल 07:50 से 09:15 तक है। इस समय नए महत्त्वपूर्ण कार्य आरंभ नहीं किए जाते।