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गुरुवार, 17 सितंबर 2026

दैनिक पंचांग

शुक्ल पक्ष

गुरुवार, शुक्ल पक्ष। षष्ठी तिथि सुबह तक है, फिर सप्तमी आरंभ होती है। षष्ठी बल की तिथि है, कठिन काम पूरे करने के लिए अच्छी। चन्द्रमा अनुराधा नक्षत्र में रात तक है, फिर ज्येष्ठा में। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है, नए कार्य के लिए शुभ। नए कार्य के लिए अभिजित मुहूर्त 11:50 से 12:40 तक शुभ है; राहु काल 13:47 से 15:19 तक है, इसमें नया कार्य न करें। चन्द्रमा वृश्चिक राशि में है और सूर्य सिंह राशि में।

तिथि · वार · चान्द्र मास

    • शुक्ल षष्ठी

      पिछले दिन 08:59 से 10:48 तक

    • फिर

      शुक्ल सप्तमी

      10:48 – अगले दिन 13:01

    षष्ठी — साहस और बल की तिथि। कठिन कार्यों को पूर्ण करने के लिए उपयुक्त।

  • गुरुवार

    गुरुवार (स्वामी गुरु/बृहस्पति) — सप्ताह का सबसे शुभ दिन; अध्ययन, संस्कार और नए आरंभ के लिए श्रेष्ठ।

  • अमान्तभाद्रपद
    पूर्णिमान्तभाद्रपद

नक्षत्र · योग · करण

    • अनुराधा

      पिछले दिन 17:22 से 19:53 तक

    • फिर

      ज्येष्ठा

      19:53 – अगले दिन 22:44

    मृदु नक्षत्र — संगीत, मैत्री और चिकित्सा जैसी कोमल गतिविधियों के लिए शुभ।

    • विष्कुम्भ

      पिछले दिन 12:22 से 12:49 तक

    • फिर

      प्रीति

      12:49 – अगले दिन 13:34

    अशुभ योग — सूर्य और चन्द्रमा का संयोग प्रतिकूल है। परंपरा में बड़े नए काम टाले जाते हैं।

    • तैतिल

      पिछले दिन 21:50 से 10:48 तक

    • फिर

      गर

      10:48 – 23:52

    • फिर

      वणिज

      23:52 – अगले दिन 13:01

    चर करण — महीने भर दोहराए जाने वाले सात करणों में से एक; सामान्य कार्यों के लिए ठीक।

एक नज़र में दिन

मुख्य रूप से गुजरात, राजस्थान और उत्तर भारत में प्रचलित समय-प्रणाली: दिन की आठ और रात की आठ अवधियाँ, प्रत्येक शुभ, सामान्य या अशुभ चिह्नित। दैनिक कार्य का स्लॉट चुनने (या टालने) का त्वरित उपाय।

दक्षिण भारतीय परंपरा जिसमें दिन और रात को आठ-आठ गौरी अवधियों में बाँटा जाता है — दैनिक कार्यों के लिए शुभ समय चुनने में सहायक।

दिन के सात सबसे महत्त्वपूर्ण मुहूर्तों का संक्षिप्त संग्रह — तीन शुभ (ब्रह्म, अभिजित, अमृत) और चार अशुभ (राहु काल, यमगण्ड, गुलिक, वर्ज्यम्)। कुछ दिनों पर एक अवधि की गणना संभव न होने पर कम भी दिख सकते हैं।

दिन और रात प्रत्येक बारह होरा (ग्रह-घंटों) में बँटते हैं, हर एक का स्वामी ग्रह होता है। स्वामी ग्रह उस घंटे का स्वभाव तय करता है — कार्य के अनुकूल स्वामी वाला घंटा चुनें।

शुक्ल षष्ठी · गुरु

00061218शुभ · 06:06 – 07:39रोग · 07:39 – 09:11उद्वेग · 09:11 – 10:43चल · 10:43 – 12:15लाभ · 12:15 – 13:47अमृत · 13:47 – 15:19काल · 15:19 – 16:51शुभ · 16:51 – 18:24अमृत · 18:24 – 19:51चल · 19:51 – 21:19रोग · 21:19 – 22:47काल · 22:47 – 00:15लाभ · 00:15 – 01:43उद्वेग · 01:43 – 03:11शुभ · 03:11 – 04:39अमृत · 04:39 – 06:07धन · 06:06 – 07:39सुख · 07:39 – 09:11चोर · 09:11 – 10:43उद्योग · 10:43 – 12:15अमृत · 12:15 – 13:47विष · 13:47 – 15:19रोग · 15:19 – 16:51लाभ · 16:51 – 18:24अमृत · 18:24 – 19:51विष · 19:51 – 21:19रोग · 21:19 – 22:47लाभ · 22:47 – 00:15धन · 00:15 – 01:43सुख · 01:43 – 03:11चोर · 03:11 – 04:39उद्योग · 04:39 – 06:07ब्रह्म मुहूर्त · 04:33 – 05:20अभिजित मुहूर्त · 11:50 – 12:40अमृत काल · 08:24 – 10:10राहु काल · 13:47 – 15:19यमगण्ड काल · 06:06 – 07:39गुलिक काल · 09:11 – 10:43वर्ज्यम् · 02:09 – 03:57गुरु · 06:06 – 07:08मंगल · 07:08 – 08:09सूर्य · 08:09 – 09:11शुक्र · 09:11 – 10:12बुध · 10:12 – 11:14चंद्र · 11:14 – 12:15शनि · 12:15 – 13:16गुरु · 13:16 – 14:18मंगल · 14:18 – 15:19सूर्य · 15:19 – 16:21शुक्र · 16:21 – 17:22बुध · 17:22 – 18:24चंद्र · 18:24 – 19:22शनि · 19:22 – 20:21गुरु · 20:21 – 21:19मंगल · 21:19 – 22:18सूर्य · 22:18 – 23:17शुक्र · 23:17 – 00:15बुध · 00:15 – 01:14चंद्र · 01:14 – 02:13शनि · 02:13 – 03:11गुरु · 03:11 – 04:10मंगल · 04:10 – 05:08सूर्य · 05:08 – 06:07

17 सित॰

दैनिक पंचांग

दिन का चौघड़िया

8·1 घं 32 मि
06:06
07:39
09:11
10:43
12:15
13:47
15:19
16:51

रात का चौघड़िया

8·1 घं 28 मि
18:24
19:51
21:19
22:47
00:15
01:43
03:11
04:39

दिन का गौरी

8·1 घं 32 मि
06:06
07:39
09:11
10:43
12:15
13:47
15:19
16:51

रात का गौरी

8·1 घं 28 मि
18:24
19:51
21:19
22:47
00:15
01:43
03:11
04:39
04:33–05:20
11:50–12:40
08:24–10:10
13:47–15:19
06:06–07:39
09:11–10:43
02:09–03:57

दिन के होरा

12·1 घं 1 मि
06:06
07:08
08:09
09:11
10:12
11:14
12:15
13:16
14:18
15:19
16:21
17:22

रात के होरा

12·59 मि
18:24
19:22
20:21
21:19
22:18
23:17
00:15
01:14
02:13
03:11
04:10
05:08

लाहिरी अयनांश और दृक् गणित (वास्तविक स्थिति) पद्धति से गणना।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

17 सितंबर 2026 की तिथि क्या है?
17 सितंबर 2026 को शुक्ल षष्ठी तिथि 10:48 तक है, फिर शुक्ल सप्तमी आरंभ होती है।
17 सितंबर 2026 का नक्षत्र क्या है?
17 सितंबर 2026 को नक्षत्र अनुराधा और योग विष्कुम्भ है।
17 सितंबर 2026 को सूर्योदय और सूर्यास्त कब है?
नई दिल्ली में सूर्योदय 06:06 पर और सूर्यास्त 18:24 पर है।
17 सितंबर 2026 को राहु काल कब है?
नई दिल्ली में राहु काल 13:47 से 15:19 तक है। इस समय नए महत्त्वपूर्ण कार्य आरंभ नहीं किए जाते।