गुरु पूर्णिमा
व्यास पूर्णिमा
जिस दिन सूर्योदय के समय यह तिथि हो, उसी दिन पर्व — पूरे दिन मनाया जाता है।
गुरु और शिक्षकों के सम्मान का दिन। भक्त अपने गुरुजनों को प्रणाम करते हैं और वेदव्यास का स्मरण करते हैं।
दैनिक पंचांग
बुधवार, शुक्ल पक्ष। इस दिन गुरु पूर्णिमा है। पूर्णिमा तिथि रात तक है, फिर प्रतिपदा आरंभ होती है। चन्द्रमा उत्तर आषाढ़ा नक्षत्र में दोपहर तक है, फिर श्रवण में। राहु काल 12:27 से 14:09 तक है, इसमें नया कार्य न करें। चन्द्रमा मकर राशि में है और सूर्य कर्क राशि में।
व्यास पूर्णिमा
जिस दिन सूर्योदय के समय यह तिथि हो, उसी दिन पर्व — पूरे दिन मनाया जाता है।
गुरु और शिक्षकों के सम्मान का दिन। भक्त अपने गुरुजनों को प्रणाम करते हैं और वेदव्यास का स्मरण करते हैं।
अधिक आषाढ़
पवित्र चंद्र अधिक मास — उपवास, दान और भक्ति-साधना का काल।
पूर्णिमा
पिछले दिन 18:19 से 20:05 तक
कृष्ण प्रतिपदा
20:05 – अगले दिन 21:30
पूर्णिमा — पूर्ण चंद्र की तिथि। भक्ति, व्रत और आरंभ किए काम पूरे करने का दिन।
बुधवार
बुधवार (स्वामी बुध) — संवाद और बुद्धि का दिन; अध्ययन, लेखन और व्यापार के लिए शुभ।
उत्तर आषाढ़ा
पिछले दिन 13:11 से 15:37 तक
श्रवण
15:37 – अगले दिन 17:43
स्थिर नक्षत्र — दीर्घकालिक संकल्प, नींव और स्थायी क्रय के लिए श्रेष्ठ।
प्रीति
पिछले दिन 23:33 से 23:57 तक
आयुष्मान्
23:57 – अगले दिन 00:05
शुभ योग — सूर्य और चन्द्रमा का संयोग अनुकूल है। अधिकांश नए आरंभ के लिए सहायक माना जाता है।
विष्टि
पिछले दिन 18:19 से 07:14 तक
बव
07:14 – 20:05
बालव
20:05 – अगले दिन 08:50
विष्टि (भद्रा) करण — महत्त्वपूर्ण नए कार्यों के लिए परंपरा में टाला जाता है; सामान्य कार्य चलते हैं।
यहाँ आज पंचांग के समय खंड परिभाषित नहीं हैं
चौघड़िया, गौरी एवं राहु काल — सभी स्थानीय दिन-प्रकाश को आठ बराबर भागों में विभाजित करते हैं। बहुत उच्च अक्षांश (~66° से ऊपर) पर सूर्य दिन-भर डूबे या उगे रह सकता है, अतः इस तारीख़ के लिए स्थानीय सूर्योदय/सूर्यास्त की जोड़ी उपलब्ध नहीं है। ऊपर दी गई तिथि, नक्षत्र एवं योग की गणना यथावत मान्य है।
मुख्य रूप से गुजरात, राजस्थान और उत्तर भारत में प्रचलित समय-प्रणाली: दिन की आठ और रात की आठ अवधियाँ, प्रत्येक शुभ, सामान्य या अशुभ चिह्नित। दैनिक कार्य का स्लॉट चुनने (या टालने) का त्वरित उपाय।
दक्षिण भारतीय परंपरा जिसमें दिन और रात को आठ-आठ गौरी अवधियों में बाँटा जाता है — दैनिक कार्यों के लिए शुभ समय चुनने में सहायक।
दिन के सात सबसे महत्त्वपूर्ण मुहूर्तों का संक्षिप्त संग्रह — तीन शुभ (ब्रह्म, अभिजित, अमृत) और चार अशुभ (राहु काल, यमगण्ड, गुलिक, वर्ज्यम्)। कुछ दिनों पर एक अवधि की गणना संभव न होने पर कम भी दिख सकते हैं।
दिन और रात प्रत्येक बारह होरा (ग्रह-घंटों) में बँटते हैं, हर एक का स्वामी ग्रह होता है। स्वामी ग्रह उस घंटे का स्वभाव तय करता है — कार्य के अनुकूल स्वामी वाला घंटा चुनें।
पूर्णिमा · बुध
29 जुल॰
दैनिक पंचांग
दिन का चौघड़िया
8·1 घं 42 मि| 05:4007:22 | ||
| 07:2209:04 | ||
| 09:0410:45 | ||
| 10:4512:27 | ||
| 12:2714:09 | ||
| 14:0915:50 | ||
| 15:5017:32 | ||
| 17:3219:14 |
रात का चौघड़िया
8·1 घं 18 मि| 19:1420:32 | ||
| 20:3221:50 | ||
| 21:5023:09 | ||
| 23:0900:27 | ||
| 00:2701:46 | ||
| 01:4603:04 | ||
| 03:0404:23 | ||
| 04:2305:41 |
दिन का गौरी
8·1 घं 42 मि| 05:4007:22 | ||
| 07:2209:04 | ||
| 09:0410:45 | ||
| 10:4512:27 | ||
| 12:2714:09 | ||
| 14:0915:50 | ||
| 15:5017:32 | ||
| 17:3219:14 |
रात का गौरी
8·1 घं 18 मि| 19:1420:32 | ||
| 20:3221:50 | ||
| 21:5023:09 | ||
| 23:0900:27 | ||
| 00:2701:46 | ||
| 01:4603:04 | ||
| 03:0404:23 | ||
| 04:2305:41 |
| 04:17–04:59 | ||
| 08:34–10:20 | ||
| 12:27–14:09 | ||
| 07:22–09:04 | ||
| 10:45–12:27 | ||
| 19:58–21:42 |
दिन के होरा
12·1 घं 8 मि| 05:4006:48 | ||
| 06:4807:56 | ||
| 07:5609:04 | ||
| 09:0410:11 | ||
| 10:1111:19 | ||
| 11:1912:27 | ||
| 12:2713:35 | ||
| 13:3514:43 | ||
| 14:4315:50 | ||
| 15:5016:58 | ||
| 16:5818:06 | ||
| 18:0619:14 |
रात के होरा
12·52 मि| 19:1420:06 | ||
| 20:0620:58 | ||
| 20:5821:50 | ||
| 21:5022:43 | ||
| 22:4323:35 | ||
| 23:3500:27 | ||
| 00:2701:20 | ||
| 01:2002:12 | ||
| 02:1203:04 | ||
| 03:0403:56 | ||
| 03:5604:49 | ||
| 04:4905:41 |
लाहिरी अयनांश और दृक् गणित (वास्तविक स्थिति) पद्धति से गणना।
KundliGPT का उपयोग कैसे होता है, यह समझने और इसे बेहतर बनाने के लिए हम कुकीज़ का उपयोग करते हैं। गोपनीयता नीति ·